लखनऊ अग्निकांड: अवैध निर्माण पर LDA की चुप्पी पर सवाल, ध्वस्तीकरण का आदेश क्यों हुआ था रद्द?

लखनऊ के अलीगंज में हुए अग्निकांड के बाद उस भवन का काला चिट्ठा खुल गया है जिसे पहले अवैध घोषित किया गया था। इस मामले में अब लखनऊ विकास प्राधिकरण की भूमिका जांच के दायरे में है।

भवन का इतिहास और विवाद

अलीगंज के सेक्टर डी स्थित भवन संख्या एमएस/102/डी का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस भवन का आवंटन मूल रूप से 11 जुलाई 1980 को विजय कुमार को किया गया था। वर्ष 2013 में इसे वीरेन्द्र प्रताप शुक्ला और सुरेन्द्र प्रताप शुक्ला को बेच दिया गया। प्राधिकरण ने 7 अगस्त 2014 को इसे नामान्तरित भी कर दिया था। कुल 1992 वर्गफीट के इस भवन का आवासीय मानचित्र 20 अगस्त 2014 को पास हुआ था, लेकिन इसके बाद हुए निर्माणों ने प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

ध्वस्तीकरण का आदेश और रहस्यमयी राहत

प्राधिकरण के रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2016 में भवन में भारी अनधिकृत निर्माण पाया गया था। इसके खिलाफ मुकदमा संख्या 08/2016 दर्ज हुआ और 10 मई 2016 को सक्षम प्राधिकारी ने इसे ढहाने का आदेश दे दिया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि मात्र दो महीने के भीतर, यानी 5 जुलाई 2016 को इस सख्त आदेश को किस आधार पर निरस्त कर दिया गया। यही फैसला अब भीषण अग्निकांड के बाद चर्चा का विषय बना हुआ है।

उच्च स्तरीय जांच और निलंबन

इस दुखद घटना के बाद शासन ने सख्ती दिखाते हुए विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। मामले की जांच के लिए पांच वरिष्ठ अधिकारियों की टीम बनाई गई है, जिसमें अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा, केके गौतम, चीफ इंजीनियर मानवेंद्र सिंह, मनोज सागर और ओएसडी रविनंदन सिंह शामिल हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अब तक निम्नलिखित कर्मचारियों को निलंबित किया जा चुका है:

  • अनिल कुमार, एई
  • प्रमोद पांडे, जेई
  • कमलेन्द्र कुमार सिंह, एफएसएसओ (इंदिरा नगर)
  • गौरव कुमार, एक्सेन कलेक्शन (जानकीपुरम)

मंत्री सुरेश कुमार खन्ना का बयान

मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने इस त्रासदी पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि, यह बहुत ही दुखद घटना है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की जाएगी और सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंद्रह पीड़ितों की मृत्यु का मुख्य कारण धुएं के कारण दम घुटना रहा।

दो होनहार युवकों ने गंवाई जान

इस हादसे में कानपुर के दो युवकों की भी जान चली गई, जो इस इमारत में स्थित एनिमेशन शॉप में 3डी आर्टिस्ट के रूप में कार्यरत थे। दोनों गहरे मित्र थे और उनके असमय निधन से उनके परिवारों में शोक की लहर है। परिजनों के लखनऊ पहुंचने के बाद स्थिति और भी भावुक हो गई है।

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