प्रोटीन का महत्व और स्रोत
फिटनेस के शौकीन और जिम जाने वाले लोग अक्सर इस उलझन में रहते हैं कि मसल्स बनाने के लिए चिकन बेहतर है या मछली। प्रोटीन एक अनिवार्य पोषक तत्व है जो शरीर की मरम्मत करने और मसल्स की ग्रोथ के लिए जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि सप्लीमेंट्स की जगह प्राकृतिक आहार से प्रोटीन लेना स्वास्थ्य के लिए अधिक फायदेमंद होता है।
चिकन में प्रोटीन की मात्रा
अगर बात केवल प्रोटीन की मात्रा की हो, तो चिकन ब्रेस्ट को सबसे बेहतरीन माना जाता है। लगभग 100 ग्राम पके हुए चिकन ब्रेस्ट में 30 से 31 ग्राम तक प्रोटीन मिलता है। इसमें फैट की मात्रा भी काफी कम होती है, जो इसे बॉडी बिल्डिंग के लिए एक आदर्श आहार बनाता है। इसमें शरीर के लिए आवश्यक सभी अमीनो एसिड भी प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं।
मछली के पोषक तत्व
मछली न केवल प्रोटीन का अच्छा स्रोत है, बल्कि यह अन्य पोषक तत्वों का भी भंडार है। औसतन 100 ग्राम मछली में 20 से 25 ग्राम प्रोटीन होता है। इसकी सबसे बड़ी खूबी इसमें मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड है, जो हृदय, मस्तिष्क और शरीर में सूजन को कम करने के लिए बेहद जरूरी है। सैल्मन, टूना और सार्डिन जैसी मछलियां पोषण के लिहाज से बहुत गुणकारी मानी जाती हैं।
मसल्स के लिए क्या चुनें?
- यदि आपका लक्ष्य केवल उच्च प्रोटीन प्राप्त करना है, तो चिकन एक प्रभावी विकल्प है।
- यदि आप मसल्स रिकवरी के साथ समग्र स्वास्थ्य और ओमेगा-3 के लाभ चाहते हैं, तो डाइट में मछली को जरूर शामिल करें।
- विशेषज्ञ दोनों के संतुलित सेवन की सलाह देते हैं ताकि शरीर को सभी जरूरी पोषक तत्व मिल सकें।
सावधानी और साइड इफेक्ट्स
दोनों ही खाद्य पदार्थों के सेवन में कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। यदि चिकन को अधिक तेल, मसालों या प्रोसेस्ड तरीके से बनाया जाए, तो इसमें कैलोरी और सोडियम की मात्रा बढ़ जाती है। वहीं, कुछ समुद्री मछलियों में पारे यानी मरकरी की मात्रा अधिक हो सकती है, इसलिए उनका बहुत ज्यादा सेवन स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं होता है। पकाने का तरीका और सामग्री की ताजगी का भी स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ता है।
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