इंदौर: शिशुकुंज स्कूल में 100 से ज्यादा बच्चे बीमार, कैंटीन में मिले एक्सपायर्ड मसाले

इंदौर के एक नामी स्कूल में बच्चों को परोसे गए भोजन के बाद 100 से अधिक छात्र फूड पॉइजनिंग का शिकार हो गए हैं। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए चार टीमें गठित की हैं।

इंदौर के प्रतिष्ठित स्कूल में हड़कंप

इंदौर का मशहूर शिशुकुंज स्कूल इन दिनों एक बड़े विवाद में घिरा हुआ है। झलारिया स्थित इस स्कूल में उस वक्त हड़कंप मच गया जब स्कूल में परोसे गए भोजन के बाद 100 से ज्यादा बच्चे अचानक बीमार पड़ गए। मामला जूनियर विंग से जुड़ा है, जहाँ केजी से लेकर चौथी कक्षा तक के बच्चों ने उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत की।

योग दिवस पर परोसा गया था भोजन

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार को स्कूल में योग दिवस के मौके पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस दौरान बच्चों को स्कूल परिसर में ही बना भोजन परोसा गया था, जिसमें राजमा, रोटी, चावल और चोलाई की सब्जी शामिल थी। भोजन करने के लगभग 48 घंटे बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। सोमवार को स्कूल में उपस्थिति पर भी इसका असर साफ दिखाई दिया और बड़ी संख्या में छात्र अनुपस्थित रहे।

अभिभावकों का भारी विरोध

अपने बच्चों के बीमार होने की सूचना मिलते ही अभिभावक बड़ी संख्या में स्कूल पहुंचे और जमकर हंगामा किया। उन्होंने स्कूल प्रबंधन पर भोजन और पानी की गुणवत्ता से समझौता करने का गंभीर आरोप लगाया है। अभिभावक इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

खाद्य विभाग की कार्रवाई और जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी है। विभाग ने स्कूल की कैंटीन पर छापा मारकर 12 खाद्य सामग्रियों के नमूने लिए हैं। इन नमूनों में राजमा, चावल, आइसक्रीम, शरबत, अचार और पनीर मसाला शामिल हैं। जांच के दौरान कैंटीन से एक्सपायर्ड मसाले और नमकीन भी बरामद किए गए हैं।

  • मामले की जांच के लिए कुल 4 टीमें गठित की गई हैं।
  • फूड सेफ्टी ऑफिसर मनीष स्वामी के नेतृत्व में पानी की शुद्धता, स्टोरेज और सप्लाई सिस्टम की बारीकी से जांच हो रही है।
  • सभी नमूनों को प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजा गया है।

प्रबंधन का पक्ष और अगली कार्रवाई

स्कूल प्रबंधन ने पहले स्थिति की गंभीरता को कम करके बताया था, लेकिन बाद में यह स्वीकार किया कि बीमार बच्चों की संख्या 100 के पार है। जूनियर विंग की हेड ऋचा तिवारी ने अभिभावकों से आग्रह किया है कि बच्चे जब तक पूरी तरह स्वस्थ न हो जाएं, उन्हें स्कूल न भेजें। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि लैब रिपोर्ट आने के बाद यदि लापरवाही साबित होती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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