म्यूचुअल फंड से निवेश कब निकालें? सही फैसला लेने के लिए जानें 5 बड़े संकेत

म्यूचुअल फंड में निवेश करना वेल्थ बनाने का अच्छा तरीका है, लेकिन सही समय पर पोर्टफोलियो की समीक्षा करना बेहद जरूरी है। जानिए वे 5 अहम संकेत जो बताते हैं कि आपके निवेश में बदलाव की जरूरत है या नहीं।

क्या हर बार म्यूचुअल फंड को होल्ड रखना सही है

म्यूचुअल फंड निवेश को अक्सर लंबे समय के लिए एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है, जिससे महंगाई को मात देकर बेहतर रिटर्न हासिल किया जा सके। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल 'खरीदो और भूल जाओ' की नीति अपनाना हमेशा फायदेमंद नहीं होता है। समय के साथ निवेशकों की जरूरतें, जोखिम लेने की क्षमता और बाजार की स्थितियां बदलती रहती हैं, इसलिए पोर्टफोलियो की समय-समय पर समीक्षा करना अनिवार्य है।

लगातार खराब प्रदर्शन

अगर आपका फंड लंबे समय से अपने कैटेगरी के अन्य फंडों के मुकाबले खराब प्रदर्शन कर रहा है, तो यह चिंता का विषय है। विशेषज्ञों के अनुसार, केवल कुछ महीनों की गिरावट को देखकर फैसला नहीं लेना चाहिए। किसी भी इक्विटी फंड का मूल्यांकन करने के लिए 3 साल से लेकर 5 साल का प्रदर्शन देखना सबसे बेहतर होता है। यदि फंड लगातार उम्मीद के मुताबिक रिटर्न नहीं दे पा रहा है, तो बाहर निकलने पर विचार करना उचित है।

निवेश रणनीति में बदलाव

निवेशक अक्सर किसी विशेष निवेश शैली को देखकर फंड चुनते हैं। यदि फंड मैनेजर अचानक अपनी घोषित रणनीति से अलग काम करने लगे या निवेश के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव करे, तो यह एक चेतावनी का संकेत हो सकता है। उदाहरण के लिए, यदि फंड अपनी मूल रणनीति को बदलकर ज्यादा जोखिम वाले शेयरों में पैसा लगाने लगे, तो यह आपके वित्तीय उद्देश्यों को बिगाड़ सकता है।

प्रबंधन और बढ़ता खर्च

फंड मैनेजर और उनकी निवेश टीम का प्रदर्शन बहुत मायने रखता है। यदि प्रबंधन में बार-बार बदलाव हो रहे हों या उनकी कार्यक्षमता पर सवाल उठ रहे हों, तो सतर्क हो जाना चाहिए। इसके अलावा, फंड का एक्सपेंस रेशियो यानी खर्च अनुपात भी देखें। यदि यह लगातार बढ़ता जा रहा है और आपके संभावित मुनाफे को कम कर रहा है, तो यह फंड बदलने का एक बड़ा कारण हो सकता है।

वित्तीय लक्ष्यों में बदलाव

कई बार समस्या फंड में नहीं, बल्कि आपकी परिस्थितियों में होती है। बच्चों की उच्च शिक्षा, घर खरीदने का सपना या किसी अन्य बड़े खर्च के लिए पैसों की जरूरत होने पर आपको निवेश रणनीति बदलनी पड़ सकती है। ऐसे में आंशिक या पूर्ण निकासी करना समझदारी है, बशर्ते आप टैक्स और एग्जिट लोड के गणित को ध्यान में रखें।

भावनात्मक फैसलों से बचें

बाजार की अस्थायी गिरावट या नकारात्मक खबरों को देखकर घबराहट में निवेश निकालना अक्सर नुकसानदेह होता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेश से जुड़ा कोई भी फैसला भावनाओं में आकर नहीं, बल्कि आंकड़ों और अपने वित्तीय लक्ष्यों के आधार पर लेना चाहिए। अनुशासित रहकर पोर्टफोलियो की समीक्षा करना ही बेहतर निवेश का एकमात्र तरीका है।

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