संघर्ष से सफलता तक का सफर
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की रहने वाली राधा देवी प्रजापति ने साबित कर दिया है कि अगर मन में कुछ करने का जज्बा हो, तो परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, सफलता जरूर मिलती है। केवल 5वीं कक्षा तक पढ़ाई करने वाली राधा देवी ने आज अपने दम पर एक सफल हर्बल बिजनेस खड़ा किया है। उनका यह सफर घरेलू सीमाओं से निकलकर आत्मनिर्भरता की एक मिसाल बन गया है।
स्वयं सहायता समूह बना आधार
राधा देवी बताती हैं कि शादी के बाद वह पूरी तरह से गृहस्थी की जिम्मेदारियों में उलझ गई थीं। उनके ससुराल में जड़ी-बूटियों का पुराना काम होता था, जिसे देखकर उन्हें भी इस क्षेत्र में कुछ करने की प्रेरणा मिली। उन्होंने कलम स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपने जीवन को एक नई दिशा दी। समूह के माध्यम से उन्हें सरकारी प्रशिक्षण मिला, जिसमें जड़ी-बूटियों की पहचान, वैज्ञानिक खेती, प्रोसेसिंग और पैकेजिंग के गुर सिखाए गए।
शुद्धता और बाजार में मांग
शुरुआत में छोटे स्तर पर काम करने वाली राधा देवी के उत्पादों पर धीरे-धीरे लोगों का भरोसा बढ़ता गया। आज उनके केंद्र पर तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा, शतावरी, मकोय का अर्क और शुद्ध च्यवनप्राश जैसे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इन औषधियों को खेतों से लाने के बाद उचित तरीके से सुखाकर और पीसकर तैयार किया जाता है, जिसके बाद उनकी आकर्षक पैकिंग कर बाजार में बेचा जाता है। स्वास्थ्य को लेकर जागरूक हो रहे ग्राहकों के बीच इन उत्पादों की भारी मांग है।
12 महिलाओं को दिया रोजगार
आज राधा देवी का बिजनेस न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रहा है, बल्कि आसपास की 10 से 12 अन्य महिलाओं के लिए भी आय का जरिया बन गया है। सीजन के दौरान काम बढ़ने पर यह संख्या और भी अधिक हो जाती है। अपनी मेहनत की कमाई से वह अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिला रही हैं। राधा देवी का कहना है कि सही मार्गदर्शन मिलने पर महिलाएं किसी भी क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना सकती हैं।
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