यूपी चुनाव की बिसात और मुस्लिम वोट बैंक
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां अभी से तेज हो गई हैं। राज्य की सत्ता की चाबी माने जाने वाले करीब 20% मुस्लिम वोट बैंक को हासिल करने के लिए सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। इस दौड़ में अब एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी आक्रामक रुख अपना लिया है।
ओवैसी की सक्रियता और अखिलेश के लिए चुनौती
14 जून 2026 को बहराइच के मटेरा में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी चुनावी दावेदारी पेश कर दी है। उनके इस कदम को सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ओवैसी की यह सक्रियता विपक्षी एकता के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है।
क्या है ओवैसी की रणनीति?
ओवैसी का उत्तर प्रदेश में बार-बार दौरा करना और मुस्लिम बहुल इलाकों में जनसभाएं करना कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है। इसके पीछे मुख्य रूप से दो कारण माने जा रहे हैं:
- एआईएमआईएम का संगठनात्मक विस्तार करना और पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाना।
- मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाकर विपक्षी गठबंधन के समीकरणों को कमजोर करना।
अब देखना यह होगा कि क्या अखिलेश यादव अपने पीडीए फॉर्मूले के जरिए मुस्लिम मतदाताओं का भरोसा बरकरार रख पाते हैं या फिर असदुद्दीन ओवैसी अपनी आक्रामक नीतियों से चुनावी नतीजों को प्रभावित करने में सफल होंगे।
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