परीक्षा को राष्ट्रीय त्योहार का दर्जा
शिक्षा के प्रति गंभीरता का इससे बेहतर उदाहरण शायद ही कहीं और देखने को मिले। दक्षिण कोरिया में हर साल नवंबर के महीने में एक ऐसा दिन आता है जिसे पूरे देश में किसी राष्ट्रीय पर्व की तरह माना जाता है। इस दिन वहां की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा 'सुनेउंग' (कॉलेज स्कोलास्टिक एबिलिटी टेस्ट) आयोजित की जाती है। यह महज एक परीक्षा नहीं है, बल्कि यह छात्रों के भविष्य और उनके सामाजिक स्तर को निर्धारित करने वाला एक महा-इवेंट है।
थमता है पूरे देश का पहिया
परीक्षा के दिन छात्रों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो और वे समय पर परीक्षा केंद्र पहुंच सकें, इसके लिए सरकार और आम जनता मिलकर पूरे देश की गति को धीमा कर देते हैं। इस दिन के विशेष प्रबंधों में निम्नलिखित शामिल हैं:
- सड़कों पर ट्रैफिक को नियंत्रित किया जाता है ताकि छात्र जाम में न फंसें।
- बाजारों और कार्यालयों के खुलने के समय में बदलाव किया जाता है।
- इंग्लिश लिसनिंग टेस्ट के दौरान 25 से 35 मिनट तक विमानों की लैंडिंग और टेक-ऑफ पर पूर्ण प्रतिबंध रहता है।
- हवा में उड़ रहे विमानों को 10,000 फीट की ऊंचाई पर होल्ड पर रखा जाता है।
- ट्रेन और वाहनों के हॉर्न बजाने पर रोक रहती है।
- सेना अपनी सभी लाइव फायर ड्रिल और प्रशिक्षण गतिविधियों को रोक देती है।
- देरी से आने वाले छात्रों की मदद के लिए पुलिस सायरन बजाते हुए उन्हें परीक्षा केंद्र तक पहुंचाती है।
अत्यंत गोपनीय तरीके से तैयार होता है पेपर
इस मैराथन परीक्षा की गोपनीयता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया करीब एक महीने पहले शुरू हो जाती है। हर साल सितंबर में देश भर से लगभग 500 शिक्षकों को चुना जाता है। इन शिक्षकों को गैंगवॉन के पहाड़ी क्षेत्र में एक गुप्त स्थान पर ले जाया जाता है। वहां रहने के दौरान:
- उनके मोबाइल फोन जब्त कर लिए जाते हैं।
- बाहरी दुनिया से उनका संपर्क पूरी तरह काट दिया जाता है।
- वे अपने परिवार से भी बातचीत नहीं कर सकते।
- पूरे परिसर की सुरक्षा वहां की खुफिया एजेंसी नेशनल इंटेलिजेंस सर्विस करती है।
- परिसर से निकलने वाले कचरे तक की बारीकी से जांच की जाती है ताकि कोई जानकारी बाहर न जाए।
परीक्षा का महत्व
8 घंटे तक चलने वाली यह परीक्षा छात्रों के करियर के लिए निर्णायक होती है। परीक्षा सुबह 8 बजकर 40 मिनट पर शुरू होती है। दक्षिण कोरिया की शिक्षा प्रणाली में प्रतिस्पर्धा का स्तर इतना अधिक है कि अच्छी यूनिवर्सिटी में दाखिला पाना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। परीक्षा के नतीजे एक महीने बाद राष्ट्रीय वेबसाइट पर सार्वजनिक किए जाते हैं, जो यह तय करते हैं कि छात्र का भविष्य, उसकी आय और जीवन स्तर कैसा होगा।
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