इंदौर का भूजल हुआ जहरीला: 79 फीसदी बोरवेल के पानी में मिला सीवरेज का कचरा

देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में भूजल की गुणवत्ता को लेकर एक डराने वाली रिपोर्ट सामने आई है। सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की जांच में शहर के बोरवेल के पानी में भारी प्रदूषण पाया गया है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।

इंदौर में जल संकट का बड़ा खुलासा

भारत के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचाने जाने वाले इंदौर के भूजल को लेकर बेहद चिंताजनक जानकारी सामने आई है। सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड यानी CGWB और इंदौर नगर निगम की ओर से की गई एक संयुक्त जांच में पाया गया कि शहर के अधिकांश इलाकों में भूजल प्रदूषित हो चुका है। रिपोर्ट में यह भी साफ हुआ है कि करीब 79 प्रतिशत बोरवेल का पानी सीवरेज के रिसाव के कारण दूषित हो गया है।

जांच में सामने आई बैक्टीरिया की मौजूदगी

इस जांच के दौरान कुल 30 बोरवेल के पानी के नमूने लिए गए थे, जिनमें से 23 में फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मौजूदगी दर्ज की गई है। यह पुष्टि करता है कि बोरवेल के पानी में सीवरेज का मिश्रण मिल रहा है। दूषित पानी के सबसे खतरनाक आंकड़े रेसकोर्स रोड स्थित आशीर्वाद एवेन्यू से सामने आए हैं, जहां फीकल कोलीफॉर्म की मात्रा 260 MPN/100 mL पाई गई है।

इन इलाकों में बढ़ा गंभीर बीमारियों का खतरा

रिपोर्ट के अनुसार, शहर के पांच मुख्य क्षेत्रों में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। इसमें साईं कृपा कॉलोनी, रेसकोर्स रोड, भागीरथपुरा और वार्ड-39 के अंतर्गत आने वाले इलाके शामिल हैं। विशेषकर भागीरथपुरा क्षेत्र में नाइट्रेट की अत्यधिक मात्रा ने विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।

  • ब्लू बेबी सिंड्रोम: विशेषज्ञों की चेतावनी है कि नाइट्रेट युक्त यह पानी 6 महीने से कम उम्र के शिशुओं में जानलेवा 'ब्लू बेबी सिंड्रोम' पैदा कर सकता है।
  • दीर्घकालिक दुष्प्रभाव: इस प्रदूषित पानी का लंबे समय तक सेवन करने से वयस्कों में कैंसर जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है।

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

वार्ड-39 के खजराना, खुदाबख्श कॉलोनी और हबीब कॉलोनी जैसे इलाकों में भूजल स्तर काफी नीचे जा चुका है, जिससे लोग नर्मदा जल पर पूरी तरह निर्भर हैं। हालांकि, वितरण व्यवस्था में भी सीवरेज रिसाव की आशंका जताई गई है। सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड ने जिला प्रशासन और नगर निगम को मानसून आने से पहले तत्काल प्रभाव से सुधारात्मक कदम उठाने की सलाह दी है। यदि समय रहते इन पाइपलाइनों और जल स्रोतों को ठीक नहीं किया गया, तो आने वाले समय में शहर का एक बड़ा हिस्सा जल प्रदूषण की गंभीर चपेट में आ सकता है।

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