मुजफ्फरपुर के प्रत्यूष की कामयाबी: 10 साल से व्हीलचेयर पर, चौथे प्रयास में बने एसडीएम

मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से जूझ रहे मुजफ्फरपुर के प्रत्यूष प्रभाकर ने अपनी शारीरिक चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए बीपीएससी की परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की है। उन्होंने ओएच श्रेणी में दूसरी रैंक प्राप्त कर उप समाहर्ता (SDM) बनने का सपना पूरा किया।

संघर्ष और जज्बे की मिसाल

बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के परिणाम ने एक ऐसे युवा की कहानी सामने रखी है, जो न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि साहस की नई परिभाषा भी लिखती है। मुजफ्फरपुर के मिठनपुरा के रहने वाले प्रत्यूष प्रभाकर ने प्रशासनिक सेवा में जगह बनाकर साबित कर दिया है कि इच्छाशक्ति के सामने शारीरिक बाधाएं भी छोटी पड़ जाती हैं। प्रत्यूष ने 1098वीं ओवरऑल रैंक और ओएच (OH) श्रेणी में दूसरी रैंक के साथ एसडीएम पद हासिल किया है।

मस्कुलर डिस्ट्रॉफी को दी मात

प्रत्यूष पिछले 10 वर्षों से मस्कुलर डिस्ट्रॉफी नामक बीमारी से संघर्ष कर रहे हैं। इस बीमारी के कारण उन्हें चलने-फिरने के लिए व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ता है। हालांकि, उनकी शारीरिक सीमाएं उनके इरादों को नहीं रोक सकीं। उन्होंने न केवल अपनी पढ़ाई जारी रखी, बल्कि सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी भी पूरी लगन के साथ की।

शिक्षा में भी रहे अव्वल

प्रत्यूष की शैक्षणिक पृष्ठभूमि अत्यंत प्रभावशाली रही है। सेंट जेवियर्स स्कूल से शुरुआती शिक्षा के बाद उन्होंने एलएस कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक और स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। उनकी मेधा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने 5 अलग-अलग विषयों में जेआरएफ (JRF) परीक्षा उत्तीर्ण की है, जिनमें राजनीति विज्ञान, लोक प्रशासन, रक्षा एवं रणनीतिक अध्ययन, अंतरराष्ट्रीय संबंध और मानवाधिकार एवं कर्तव्य शामिल हैं। उन्होंने पीएचडी की उपाधि भी प्राप्त की है।

बिना कोचिंग घर पर की तैयारी

सफलता का यह रास्ता आसान नहीं था। प्रत्यूष ने इससे पहले 65वीं, 66वीं और 67वीं बीपीएससी परीक्षा में भाग लिया था, लेकिन सफलता उनसे दूर रही। इसके बाद शोध कार्यों के कारण उन्होंने कुछ समय का विराम लिया। अपनी चौथी कोशिश में, यानी 70वीं बीपीएससी परीक्षा में उन्होंने इतिहास रच दिया। प्रत्यूष बताते हैं कि बीमारी के कारण कोचिंग जाना संभव नहीं था, इसलिए उन्होंने घर पर ही रहकर बिना किसी पेड ऑनलाइन क्लास या कोचिंग की मदद के खुद से तैयारी की।

युवाओं के लिए प्रेरणा

अपनी इस बड़ी सफलता का श्रेय प्रत्यूष अपने परिवार को देते हैं। उनका मानना है कि उनके परिवार ने हमेशा उन्हें संबल प्रदान किया और कभी भी खुद को किसी से कम नहीं महसूस होने दिया। सफलता की तलाश कर रहे युवाओं के लिए प्रत्यूष का संदेश साफ है। उनका कहना है, खुद पर भरोसा रखें, पूरी ईमानदारी के साथ मेहनत करें और अपने लक्ष्य पर नजर टिकाए रखें। सफलता मिलने में वक्त लग सकता है, लेकिन वह निश्चित रूप से मिलती है।

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