NEET यूजी परीक्षा में बड़ा फर्जीवाड़ा: असली परीक्षार्थियों की जगह बैठे सॉल्वर, कुल 30 लोग गिरफ्तार

लखीसराय में NEET यूजी पुनर्परीक्षा के दौरान प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 9 सॉल्वरों और बायोमेट्रिक एजेंसी के 21 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है।

परीक्षा केंद्रों पर छापेमारी और गिरफ्तारी

नीट यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा के दौरान लखीसराय जिले में एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। जिला प्रशासन ने परीक्षा केंद्रों पर सघन छापेमारी की, जिसमें असली अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा दे रहे 9 फर्जी परीक्षार्थियों को धर दबोचा गया। इसके अलावा, बायोमेट्रिक सत्यापन का काम देख रही निजी एजेंसी के 21 कर्मियों को भी गिरफ्तार किया गया है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि सॉल्वरों को परीक्षा केंद्र में घुसने और नकल कराने के लिए भारी-भरकम रकम का सौदा किया गया था।

मेडिकल कॉलेजों से जुड़े हैं सॉल्वर

एसडीओ प्रभाकर कुमार के अनुसार, हिरासत में लिए गए कई युवक खुद को मेडिकल छात्र बता रहे हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इनमें से कुछ छात्र पीएमसीएच, एएनएमएमसीएच गया और दिल्ली के बड़े संस्थानों से जुड़े हैं। जांच एजेंसियां अब इनके शैक्षणिक दस्तावेजों की सत्यता परख रही हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि प्रत्येक छात्र से एडवांस के तौर पर 10 से 12 लाख रुपये लिए गए थे।

मास्टरमाइंड और गैंग का खुलासा

इस पूरे रैकेट का मुख्य सूत्रधार राजगीर के पावापुरी मेडिकल कॉलेज का छात्र रविशंकर बताया जा रहा है। उसने ही अलग-अलग कॉलेजों के छात्रों को सॉल्वर के रूप में तैयार किया था। वहीं, पुलिस ने हाजीपुर निवासी और पटना मेडिकल कॉलेज के चौथे वर्ष के छात्र मयंक कश्यप को भी पकड़ा है, जिसने बायोमेट्रिक स्टाफ बनकर धांधली को अंजाम देने की कोशिश की थी।

बायोमेट्रिक एजेंसी की भूमिका संदिग्ध

मामले में बायोमेट्रिक एजेंसी की भूमिका सबसे अधिक संदेह के घेरे में है। पुलिस का कहना है कि कई सॉल्वरों को बिना सही बायोमेट्रिक मिलान के ही केंद्रों में प्रवेश दिया गया। इस मामले में एजेंसी के 21 कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आने के बाद अब यह जांच की जा रही है कि क्या यह कोई सोची-समझी अंतरराज्यीय साजिश थी।

इन केंद्रों से पकड़े गए आरोपी

प्रशासन ने चार अलग-अलग परीक्षा केंद्रों पर कार्रवाई की। केंद्रीय विद्यालय किऊल से 7, राजकीय हाइस्कूल हसनपुर से 1 और केआरके हाइस्कूल से 1 फर्जी परीक्षार्थी पकड़ा गया। फिंगरप्रिंट और फोटो का मिलान न होने पर अधिकारियों को गड़बड़ी का अंदेशा हुआ था। वर्तमान में डीएम शैलेंद्र कुमार और एसपी प्रेरणा कुमार के नेतृत्व में पुलिस की टीमें मामले की परतें उधेड़ने में जुटी हैं।

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