शरीर के संकेतों को समझें
बढ़ती उम्र के साथ हमारे शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं, जिन्हें हम अक्सर सामान्य समझ लेते हैं। इनमें से कई ऐसी समस्याएं होती हैं जिनके बारे में लोग किसी से बात करने में शर्म महसूस करते हैं। बार-बार पेशाब आना, रात के समय बार-बार शौचालय जाना या फिर हंसते, खांसते और छींकते समय अनियंत्रित पेशाब निकल जाना ऐसी ही परेशानियां हैं। फरीदाबाद के अमृता अस्पताल की वरिष्ठ सलाहकार आंतरिक चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. शुभ्रा रैना के अनुसार, इन्हें महज उम्र का तकाजा मानकर नजरअंदाज करना घातक हो सकता है। यह लक्षण शरीर के भीतर पनप रही अन्य बीमारियों का संकेत हो सकते हैं, इसलिए समय रहते डॉक्टर से परामर्श करना बहुत जरूरी है।
समस्या के मुख्य कारण
डॉक्टर रैना के मुताबिक, पुरुषों और महिलाओं में इन समस्याओं के पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं। पुरुषों में मुख्य रूप से प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ना, प्रोस्टेट की सर्जरी या कैंसर के उपचार के बाद ये लक्षण दिख सकते हैं। वहीं महिलाओं में हार्मोनल बदलाव और पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों के कमजोर होने से यह दिक्कत पैदा होती है। इसके अलावा कुछ अन्य प्रमुख कारण इस प्रकार हैं:
- शरीर का अधिक वजन या मोटापा।
- डायबिटीज की समस्या।
- किडनी में पथरी या किडनी से जुड़ी अन्य बीमारियां।
- ओवरएक्टिव ब्लैडर की स्थिति।
क्या है स्ट्रेस इनकॉन्टिनेंस?
महिलाओं में देखी जाने वाली एक आम समस्या 'स्ट्रेस इनकॉन्टिनेंस' है। इसमें छींकने, खांसने या जोर से हंसने पर पेशाब निकल जाता है। इसका कारण पेल्विक फ्लोर की उन मांसपेशियों का कमजोर होना है, जो पेट और गर्भाशय को सहारा देती हैं। जब ये मांसपेशियां कमजोर होती हैं, तो पेट पर थोड़ा सा दबाव पड़ते ही पेशाब को रोक पाना मुश्किल हो जाता है।
उपचार और बचाव के उपाय
विशेषज्ञ का कहना है कि 40 वर्ष की उम्र के बाद यह समस्या अधिक देखने को मिलती है, लेकिन युवाओं में भी इसके लक्षण दिख सकते हैं। इसका इलाज पूरी तरह संभव है, बशर्ते इसे छिपाया न जाए।
- विशेष एक्सरसाइज: पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाली विशेष कसरत से काफी राहत मिल सकती है।
- विशेषज्ञ की सलाह: पुरुष मूत्र रोग विशेषज्ञ और महिलाएं मूत्र रोग विशेषज्ञ या स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिल सकती हैं।
- चिकित्सीय हस्तक्षेप: कुछ मामलों में डॉक्टर दवाओं या सर्जरी की सलाह भी दे सकते हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पेशाब पर नियंत्रण न रहने जैसी समस्याओं को छिपाने के बजाय समय पर इलाज करवाया जाए। सही समय पर उपचार लेने से व्यक्ति दोबारा एक सामान्य और स्वस्थ जीवन व्यतीत कर सकता है।
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