राम मंदिर चंदा चोरी मामला: कौन है फूलकांत मिश्रा, जिसकी आलीशान लाइफस्टाइल और संपत्ति पर उठे सवाल

राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले में SIT की जांच तेज हो गई है और अब फूलकांत मिश्रा नाम का शख्स चर्चा में है। मंदिर के आभूषणों के रखरखाव से जुड़े फूलकांत की अचानक बढ़ी संपत्ति ने जांच एजेंसियों का ध्यान आकर्षित किया है।

SIT की जांच और प्रारंभिक रिपोर्ट

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी होने के मामले में विशेष जांच दल यानी SIT ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार कर ली है। रविवार शाम SIT ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर 6 दिनों में की गई 60 घंटों की विस्तृत जांच का ब्योरा दिया है। फिलहाल इस रिपोर्ट में ट्रस्ट के किसी वरिष्ठ पदाधिकारी को दोषी नहीं माना गया है, बल्कि मंदिर में दान राशि की गिनती और उसके रखरखाव की प्रक्रिया में गंभीर खामियां पाई गई हैं। इस रिपोर्ट में ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के उन कर्मचारियों के नाम शामिल हैं, जो दान की गणना प्रक्रिया का हिस्सा थे। यह केवल एक शुरुआती रिपोर्ट है और विस्तृत जांच रिपोर्ट 15 दिन बाद सौंपी जाएगी।

जांच के दायरे में फूलकांत मिश्रा

इस मामले में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के बाद एक नया नाम सामने आया है, जो है फूलकांत मिश्रा। फूलकांत पर मंदिर के आभूषणों की देखभाल और उनके रखरखाव की अहम जिम्मेदारी थी। सूत्रों के अनुसार, फूलकांत के पास अयोध्या के पॉश इलाके में आलीशान बंगला है और वह चार महंगी गाड़ियां इस्तेमाल करता है। बताया जाता है कि कुछ साल पहले तक फूलकांत एक साधारण दुकान में रत्न और नग बेचने का काम करता था और लोगों का भविष्य देखता था, लेकिन अब उसका रहन-सहन पूरी तरह बदल गया है। चर्चा है कि वह ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का करीबी है और ट्रस्ट की अनुमति के बिना प्रतिबंधित क्षेत्रों में उसकी सीधी पहुंच थी।

परिजनों के दावों और हकीकत का अंतर

फूलकांत मिश्रा का परिवार और उसका भाई साकेत मिश्रा, जो कि रेलवे स्टेशन के पास साकेत रत्न नाम से दुकान चलाता है, उनके दावों पर सवाल उठ रहे हैं:

  • साकेत का दावा है कि फूलकांत मंदिर के भीतर नहीं जाता, जबकि उसके पास मंदिर के अंदर की तस्वीरें मौजूद हैं।
  • परिवार का कहना है कि उनकी गाड़ियों का मंदिर से कोई वास्ता नहीं है, लेकिन फूलकांत के भतीजे ने खुद स्वीकार किया है कि उनकी गाड़ियां राम मंदिर के काम में चलती हैं।
  • फूलकांत के परिजन उसे मंदिर प्रबंधन से दूर बताते हैं, जबकि सबूतों से पता चलता है कि वह दान-दक्षिणा प्रबंधन की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल था।

चढ़ावे के रखरखाव में गंभीर खामियां

SIT की रिपोर्ट ने मंदिर में चढ़ावे और कीमती वस्तुओं के प्रबंधन पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं:

  • दानपात्र से राशि निकालने से लेकर उसे सुरक्षित रखने और बैंक तक पहुँचाने की पूरी व्यवस्था दोषपूर्ण है।
  • सोने-चांदी के आभूषणों की गिनती और उनके रखरखाव के तरीके सुरक्षित नहीं हैं।
  • लॉकर के लिए अनिवार्य दो अलग-अलग चाबियों के प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया जा रहा है।
  • SIT अब तक 150 लोगों से पूछताछ कर चुकी है, जिनमें से 25 लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।

पदाधिकारियों पर यात्रा प्रतिबंध

जांच के बीच SIT ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों और चढ़ावा चोरी के मामले में नामजद कर्मचारियों के अयोध्या से बाहर जाने पर रोक लगा दी है। अब सभी की निगाहें 15 दिन बाद आने वाली अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके बाद संदिग्धों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत मिल रहे हैं।

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