विश्व ऊंट दिवस: 50 डिग्री तापमान में भी अमृत के समान है ऊंटनी का दूध, जानिए इसे 'व्हाइट गोल्ड' क्यों कहते हैं

थार के रेगिस्तान में ऊंटनी का दूध केवल पोषण का स्रोत नहीं, बल्कि आर्थिक मजबूती का जरिया भी बन चुका है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह दूध कई गंभीर बीमारियों से लड़ने में कारगर है।

रेगिस्तान का अनमोल उपहार

थार मरुस्थल की तपती गर्मी में जहां पारा 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, वहां ऊंट जीवन का आधार बने हुए हैं। ऊंट केवल सवारी या सामान ढोने के काम ही नहीं आते, बल्कि इनका दूध स्वास्थ्य के लिए एक बड़े खजाने से कम नहीं है। यही कारण है कि इसे बाजार में व्हाइट गोल्ड के नाम से पुकारा जाता है।

स्वास्थ्य के लिए क्यों है खास

आयुर्वेद विभाग के उपनिदेशक डॉ. रमेश धनदे का कहना है कि ऊंटनी का दूध शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में बेहद सहायक है। इसमें कई ऐसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो सामान्य दूध की तुलना में इसे काफी अलग बनाते हैं:

  • इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन-सी, कैल्शियम और आयरन पाया जाता है।
  • यह पोटेशियम और प्रोटीन का भी एक बेहतरीन स्रोत है।
  • कम वसा और उच्च पोषक मूल्य होने के कारण स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग इसे प्राथमिकता दे रहे हैं।

सरकार का संरक्षण अभियान

राजस्थान सरकार ऊंटों के घटती संख्या को लेकर काफी गंभीर है और इन्हें बचाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। उष्ट विकास योजना के जरिए पशुपालकों को आर्थिक सहायता दी जा रही है। इस योजना के तहत, जब ऊंटनी के बच्चे का जन्म होता है तो पशुपालक को 20 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। इसके अलावा, ऊंटों की तस्करी रोकने और इनकी आबादी को सुरक्षित रखने के लिए राज्य से बाहर इनके परिवहन और खरीद-फरोख्त पर भी सख्त प्रतिबंध लागू किए गए हैं।

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