गर्मी में लो वोल्टेज की समस्या से मिलेगी निजात, MANIT भोपाल के वैज्ञानिकों ने खोजा शानदार समाधान

भोपाल के मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने सोलर इन्वर्टर से वोल्टेज स्थिर करने की नई तकनीक विकसित की है। इससे महंगे स्टेबलाइजर की जरूरत खत्म होगी और बिजली उपकरणों के खराब होने का खतरा नहीं रहेगा।

वोल्टेज की समस्या से मिलेगी राहत

गर्मी के मौसम में बिजली के वोल्टेज में बार-बार आने वाले उतार-चढ़ाव से हर कोई परेशान रहता है। कभी वोल्टेज इतना कम हो जाता है कि पंखे धीमी गति से चलने लगते हैं, तो कभी वोल्टेज बढ़ने से टीवी, फ्रिज और अन्य कीमती इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जलने का डर बना रहता है। अब इस बड़ी समस्या का तकनीकी समाधान सामने आया है। भोपाल स्थित मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MANIT) के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जो बिना किसी महंगे स्टेबलाइजर के वोल्टेज को स्थिर रखने में सक्षम है।

कैसे काम करती है यह नई तकनीक

यह शोध संस्थान के सेंटर फॉर मिशन ऑन एनर्जी ट्रांजिशन (CMET) में डॉ. प्रियंका पालीवाल और डॉ. मुकेश किरार की टीम द्वारा किया गया है। शोधकर्ताओं ने सोलर इन्वर्टर की रिएक्टिव पावर क्षमता का उपयोग करने का नया तरीका निकाला है। आमतौर पर सोलर इन्वर्टर सिर्फ बिजली बनाने और उसे ग्रिड तक पहुंचाने का काम करते हैं, लेकिन अब इसे एक वोल्टेज कंट्रोलर के रूप में भी अपग्रेड किया जा सकेगा। इससे वोल्टेज में होने वाले उतार-चढ़ाव पर लगाम लग सकेगी और उपभोक्ताओं को महंगे स्टेबलाइजर पर अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ेगा।

230 किलोवाट के प्लांट पर सफल परीक्षण

इस तकनीक का सफल प्रदर्शन MANIT परिसर में लगे 230 किलोवाट के रूफटॉप सोलर प्लांट पर किया गया है। प्रदर्शन के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि पहले से लगे सोलर इन्वर्टर वास्तविक समय यानी रियल टाइम में वोल्टेज को नियंत्रित कर सकते हैं और बिजली की गुणवत्ता में सुधार ला सकते हैं। इस तकनीकी नवाचार को नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के अधिकारियों और ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों की सराहना भी मिली है। शोधकर्ताओं का दावा है कि यह तकनीक दिन के अलावा रात के समय भी ग्रिड को स्थिरता प्रदान कर सकती है।

पीएम-कुसुम योजना के लिए वरदान

विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक PM-KUSUM Scheme के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इस योजना के अंतर्गत पूरे देश में हजारों मेगावाट क्षमता के छोटे और विकेंद्रीकृत सोलर प्लांट लगाए जा रहे हैं, जो सीधे ग्रामीण बिजली वितरण नेटवर्क से जुड़े हैं। इस नई तकनीक के इस्तेमाल से ये सोलर इन्वर्टर न केवल बिजली का उत्पादन करेंगे, बल्कि ग्रिड में वोल्टेज को स्थिर बनाए रखने और बिजली की गुणवत्ता सुधारने में भी सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे।

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