गर्म जलवायु में सेब की सफल खेती
बिहार, जिसे कभी सेब के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता था, अब खुद इस फल का उत्पादन कर रहा है। पश्चिम चम्पारण, गया, बेगूसराय और मुजफ्फरपुर जैसे जिलों में किसान अब व्यावसायिक स्तर पर सेब उगा रहे हैं। सामान्य तौर पर ठंडे इलाकों में होने वाला सेब अब बिहार के गर्म वातावरण में अपनी नई पहचान बना रहा है।
HRMN 99 प्रजाति का कमाल
बिहार में सेब की सफलता के पीछे मुख्य कारण HRMN 99 प्रजाति है। यह किस्म इतनी मजबूत है कि 45 से 48 डिग्री सेल्सियस के तापमान में भी न केवल जीवित रहती है, बल्कि फल भी देती है। किसानों का अनुभव है कि पौधा लगाने के 1 से 2 साल के भीतर ही उत्पादन शुरू हो जाता है। बेतिया के किसान शिशिर दुबे ने अपने बगीचे में 70 पौधे लगाए हैं, जिनमें से हर पेड़ से 8 से 10 किलो तक सेब प्राप्त हो रहा है।
बाजार में जल्द पहुंच और मुनाफा
ठंडे प्रदेशों में सेब की कटाई आमतौर पर सितंबर-अक्टूबर में होती है, लेकिन बिहार में इसका उत्पादन जुलाई तक पूरा हो जाता है। इसका बड़ा लाभ यह है कि बाजार में ये सेब दो महीने पहले ही उपलब्ध हो जाते हैं, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिलते हैं। वर्तमान में बाजार में यह सेब 200 रुपये से लेकर 250 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। स्वाद और गुणवत्ता में यह ठंडे इलाकों के सेब को पूरी तरह टक्कर देता है, जो पूरी तरह पकने पर लाल, मीठा और रसीला हो जाता है।
बिहार के प्रगतिशील किसान
राज्य के कई किसान इस नई पहल से जुड़ रहे हैं। नौतन प्रखंड के बैकुंठवा गांव के शिशिर दुबे के अलावा, बेतिया के मेराजुल हक, मझौलिया के रविकांत पांडे और रामनगर के विजय गिरी जैसे प्रगतिशील किसान भी अपने खेतों में सेब की बंपर पैदावार ले रहे हैं। मेराजुल हक ने भी अपने बाग में दर्जनों पेड़ लगाए हैं, जो आज उन्हें अच्छी आय दे रहे हैं।
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