शून्य से शिखर तक का सफर
रांची के अपर बाजार के रहने वाले महेश पोद्दार आज देश के सफल उद्योगपतियों में गिने जाते हैं। उनके इस लंबे सफर की शुरुआत 40 साल पहले रांची के एक छोटे से कमरे से हुई थी, जहां से उन्होंने माइक वायर लिमिटेड नाम की कंपनी की नींव रखी थी। मेहनत और लगन के दम पर खड़ा किया गया यह व्यापार आज इतना विस्तृत हो चुका है कि उनकी फैक्ट्रियां विशाखापट्टनम, बेंगलुरु और नागपुर जैसे बड़े शहरों तक फैली हुई हैं।
शिक्षा और करियर की शुरुआत
महेश पोद्दार के पिता गुमला में कपड़ों का छोटा सा व्यापार करते थे। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई रांची के संत ज़ेवियर स्कूल से पूरी की और उसके बाद उच्च शिक्षा के लिए बेंगलुरु चले गए, जहाँ से उन्होंने इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। खुद का काम करने की इच्छा के चलते उन्होंने 1977 में रांची के माहीलॉन्ग में अपनी पहली वायर इंडस्ट्री की शुरुआत की।
प्रभावशाली पदों पर रहे आसीन
व्यावसायिक सफलता के साथ-साथ महेश पोद्दार ने कई प्रतिष्ठित पदों पर भी जिम्मेदारी संभाली है। वे राज्यसभा के सदस्य भी रह चुके हैं और उन्होंने कई औद्योगिक संस्थाओं का नेतृत्व किया है। वे वायर संगठन इंटरनेशनल के डायरेक्टर पद पर भी कार्य कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त, वे झारखंड कॉमर्स चैंबर्स के डायरेक्टर और झारखंड स्मॉल इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के प्रेसिडेंट के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
आज का विशाल साम्राज्य और सादगी
महेश पोद्दार के उद्योगों में आज 2,000 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। वायर इंडस्ट्री के अलावा, उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भी अपनी एक अलग पहचान बनाई है। इतनी बड़ी सफलता हासिल करने के बावजूद, महेश पोद्दार की सादगी में कोई बदलाव नहीं आया है। वे आज भी रांची के अपर बाजार की गलियों में एक साधारण व्यक्ति की तरह घूमते देखे जाते हैं। उनका मानना है कि सच का साथ देने से कभी डरना नहीं चाहिए। राज्यसभा में सदस्य रहने के दौरान भी उन्होंने रांची के रिंग रोड और अन्य महत्वपूर्ण विषयों को मजबूती से उठाया था। उनका कहना है कि शुरुआत में संघर्ष जरूर आता है, लेकिन सही रास्ते पर चलने वालों को अंत में सफलता अवश्य मिलती है।
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