ट्रंप की चेतावनी का ईरान पर गहरा असर
अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक बातचीत के दौरान हालात तब बिगड़ गए, जब डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक तीखी टिप्पणी की। जेनेवा में चल रही बैठक के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि यदि ईरान ने अपने प्रॉक्सी समूहों, विशेष रूप से हिजबुल्लाह को नहीं रोका, तो अमेरिका उस पर पिछले सप्ताह से भी अधिक बड़ा हमला करेगा। इस धमकी के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने कड़ा ऐतराज जताया और मीटिंग हॉल से बाहर निकल गए। पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता की कोशिशें भी इस दौरान विफल साबित हुईं।
ईरान का पलटवार
ट्रंप की टिप्पणी का जवाब देते हुए ईरान की नेशनल असेंबली के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गलीबाफ ने कहा कि यदि अमेरिकी धमकियां काम करतीं, तो आज वॉशिंगटन की स्थिति कुछ और होती। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरानी सेना किसी भी स्थिति का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है और अमेरिकी नेताओं को अपने बयानों में संयम बरतना चाहिए। इस गर्मागर्मी के बावजूद, दोनों देशों के बीच करीब 82 मिनट तक बातचीत का दौर चला था।
पहले दौर की वार्ता के प्रमुख बिंदु
मुलाकात के दौरान कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई, जिनके विवरण इस प्रकार हैं:
- ईरान ने अपनी फ्रीज की गई संपत्तियों की वापसी और ऊर्जा क्षेत्र पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने की मांग उठाई।
- ईरानी प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों को कम करने के लिए एक ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिया गया है।
- कतर में फ्रीज किए गए ईरान के 6 अरब डॉलर को वापस करने की प्रक्रिया पर चर्चा हुई।
- अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख जेडी वेंस ने पुरानी कड़वाहट को पीछे छोड़ने की इच्छा जताई।
- दोनों देशों के बीच एक MOU पर दस्तखत किए गए, जिसके तहत परमाणु कार्यक्रम को लेकर 60 दिन के भीतर समझौते पर सहमति बनानी है।
- अमेरिका ने स्पष्ट किया कि ईरान को किसी भी हाल में परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
परमाणु कार्यक्रम पर अड़ा ईरान
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका देश किसी भी दबाव, दमन या अपमान के आगे नहीं झुकेगा। उन्होंने जोर दिया कि ईरान अपने विकास और तरक्की के अधिकार से समझौता नहीं करेगा। वर्तमान में ईरान ने ट्रंप की ओर से दिए गए बयानों के लिए माफी की मांग की है। हालांकि, आधिकारिक स्तर पर ईरान ने वार्ता से पूरी तरह बाहर होने का संकेत नहीं दिया है, लेकिन बातचीत अब एक अत्यंत संवेदनशील और कठिन दौर में पहुंच गई है। वहीं, इज़रायल ने भी स्पष्ट कर दिया है कि उसकी सेना दक्षिणी लेबनान के ब्यू-फोर्ट कॉसल से पीछे नहीं हटेगी।
https://www.indiatv.in/world/around-the-world/iran-delegation-left-us-iran-talks-over-attack-threat-by-us-president-donald-trump-2026-06-22-1226636