तांबे के बर्तन का सही इस्तेमाल है जरूरी
आयुर्वेद में तांबे के बर्तन में पानी पीने की परंपरा सदियों पुरानी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, तांबे के पात्र में रखा पानी कॉपर आयन अवशोषित कर लेता है, जो शरीर के लिए एक महत्वपूर्ण सूक्ष्म पोषक तत्व है। हालांकि, तांबे के बर्तन का लाभ तभी मिलता है जब इसका उपयोग सही ढंग से किया जाए। गलत तरीके से किया गया इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
पानी को लंबे समय तक न रखें
कई लोग एक बार तांबे के बर्तन में पानी भरते हैं और उसे पूरे दिन या कई दिनों तक इस्तेमाल करते हैं। डॉ. सरोज गौतम के मुताबिक, तांबे के बर्तन में पानी को 6 से 8 घंटे से अधिक नहीं रखना चाहिए। यदि पानी को बहुत लंबे समय तक छोड़ दिया जाए, तो वह अत्यधिक मात्रा में कॉपर ग्रहण कर सकता है, जो शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है। हमेशा ताजा पानी भरें और समय-समय पर उसे बदलते रहें।
खट्टे पदार्थों से रखें दूरी
तांबे के बर्तन में कभी भी नींबू पानी, इमली का पानी, जूस या सिरके जैसे एसिडिक यानी खट्टे पदार्थ नहीं रखने चाहिए। ये खट्टे तत्व तांबे के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया कर सकते हैं, जिससे ऐसे हानिकारक यौगिक पैदा हो सकते हैं जो आपकी सेहत बिगाड़ सकते हैं। तांबे के पात्र का उपयोग केवल सामान्य पानी रखने के लिए ही करें।
नियमित सफाई है बेहद जरूरी
समय के साथ तांबे के बर्तन की भीतरी सतह पर एक परत जम जाती है, जिससे इसकी चमक फीकी पड़ने लगती है। यदि बर्तन को नियमित रूप से साफ नहीं किया गया, तो यह अस्वच्छ हो सकता है। बर्तन की चमक और स्वच्छता बनाए रखने के लिए आप नींबू और नमक का उपयोग कर सकते हैं, या फिर बाजार में मिलने वाले कॉपर क्लीनर का इस्तेमाल किया जा सकता है।
सावधानी बरतें
तांबे के बर्तन का पानी सीमित मात्रा में ही पीना बेहतर है। पूरे दिन केवल तांबे के बर्तन का ही पानी पीने के बजाय इसे दिनचर्या में संतुलित तरीके से शामिल करें। यदि आपको पहले से ही किडनी, लिवर या अन्य कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, तो इस तरह के पानी का सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
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