खेती में बदलाव की जरूरत
बिहार के भागलपुर जैसे क्षेत्रों में जहां किसान मुख्य रूप से खेती पर निर्भर हैं, वहां पारंपरिक फसलों की बढ़ती लागत ने मुनाफे को कम कर दिया है। इसी के चलते किसान अब सब्जियों की ओर रुख कर रहे हैं, जिसमें हरी मिर्च एक शानदार विकल्प बनकर उभरी है। कृषि जानकारों का कहना है कि अगर सही तरीके से प्रबंधन किया जाए, तो कम समय में हरी मिर्च की खेती से किसान अपनी लागत के मुकाबले कई गुना ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं।
मुनाफा देने वाली प्रमुख किस्में
विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार की मांग और जलवायु को देखते हुए चुनिंदा किस्मों का चयन करना सफलता की कुंजी है। इन किस्मों की खासियत इनका बड़ा आकार, वजन और लंबी भंडारण क्षमता है:
- वीएनआर-332
- बीएसएस-453
- काशी गौरव-338
बाजार में अच्छी गुणवत्ता और दिखने में आकर्षक मिर्च को ग्राहक और व्यापारी दोनों पसंद करते हैं, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिल जाते हैं। ऑफ-सीजन में खेती करके किसान और भी अधिक लाभ उठा सकते हैं।
फसल को रोगों से बचाने का तरीका
हरी मिर्च की खेती में सबसे बड़ी चुनौती फंगल संक्रमण और वायरस का खतरा है। पौधा संरक्षण विभाग के अधिकारी सुजीत पाल के मुताबिक, येलो मोजेक वायरस फसल को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाता है, जिससे पौधों का विकास रुक जाता है। फसल को सुरक्षित रखने के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाना जरूरी है:
- खेत की नियमित रूप से निगरानी करते रहें।
- समय-समय पर नीम के तेल का छिड़काव करें।
- कीटों को फंसाने के लिए स्टिकी ट्रैप का इस्तेमाल करें।
- जरूरत पड़ने पर अनुशंसित कीटनाशकों का प्रयोग करें।
यदि किसान इन बातों का ध्यान रखें और उन्नत किस्मों का चुनाव करें, तो हरी मिर्च का कम क्षेत्र भी उन्हें बड़ी आमदनी दिला सकता है। उचित देखभाल ही इस खेती में जोखिम को कम करने का एकमात्र तरीका है।
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