राम मंदिर चंदा चोरी मामला: एसआईटी जांच की रफ्तार और डिजिटल सबूतों का संकट

राम मंदिर में दान की गई राशि में कथित हेरफेर की जांच के लिए गठित एसआईटी लखनऊ पहुंच चुकी है और जल्द ही अपनी शुरुआती रिपोर्ट पेश कर सकती है। जांच में सीसीटीवी फुटेज का डिलीट होना और बयानों में विरोधाभास बड़ी चुनौतियां बनकर उभरा है।

एसआईटी की जांच और मौजूदा स्थिति

राम मंदिर में चंदे के पैसों में कथित हेरफेर की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय एसआईटी अब पूरी तरह सक्रिय है। टीम लखनऊ पहुंच चुकी है और संभावना है कि सोमवार तक अपनी शुरुआती रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी जाएगी। जांच का दायरा काफी विस्तृत है जिसमें मंदिर के स्टाफ की नियुक्ति, सुरक्षा प्रबंध और प्रशासनिक कामकाज की गहन पड़ताल शामिल है।

डिजिटल सबूतों के सामने चुनौतियां

जांच में सबसे बड़ी बाधा सीसीटीवी फुटेज को लेकर आ रही है। सूत्रों के अनुसार, मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज का बैकअप सिस्टम केवल 45 दिनों तक का ही डेटा स्टोर कर पाता है, जिसके बाद पुरानी रिकॉर्डिंग स्वतः ही डिलीट हो जाती है। इस तकनीकी सीमा के कारण जांचकर्ताओं के लिए पुराने वीडियो खंगालना लगभग नामुमकिन हो गया है। इसके अलावा, फुटेज के साथ कथित छेड़छाड़ के संकेत भी मिले हैं, जिन्हें फोरेंसिक तकनीक से रिकवर करने की कोशिश की जा रही है।

पूछताछ और संदिग्धों का दायरा

जांच टीम ने कई कर्मचारियों और प्रबंधन से जुड़े लोगों से पूछताछ की है। पूछताछ के दौरान मयंक, शिवम पांडे, आशीष दुबे और रत्नेश जैसे कर्मचारियों के बयानों में कई विरोधाभास सामने आए हैं। इसके अलावा, कीमती वस्तुओं के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार आशीष अग्निहोत्री और दान में मिले आभूषणों की देखभाल करने वाले फूलकांत मिश्रा भी जांच के दायरे में हैं। फूलकांत मिश्रा की संपत्ति और जीवनशैली को लेकर भी संदेह जताया जा रहा है, हालांकि उनके परिवार ने इसे उनके निजी व्यापार की कमाई बताया है।

कुंभ मेले के दौरान दान का रिकॉर्ड

एसआईटी 66 दिनों तक चले महाकुंभ के दौरान प्राप्त दान के आंकड़ों की भी समीक्षा कर रही है। इस दौरान 5 करोड़ से अधिक श्रद्धालु राम मंदिर पहुंचे थे। जांचकर्ताओं का मुख्य संदेह इस बात पर है कि इतनी भारी भीड़ के बावजूद दान पात्रों में जमा राशि उम्मीद से काफी कम रही है।

मामले की पृष्ठभूमि

इस पूरे विवाद की शुरुआत 7 जून को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा लगाए गए आरोपों से हुई थी। इसके बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की मांग पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को एसआईटी का गठन किया था। ट्रस्ट का कहना है कि वे आंतरिक स्तर पर ऑडिट करवा रहे हैं और अभी तक आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई पुख्ता प्रमाण सामने नहीं आया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आश्वस्त किया है कि जांच के जरिए पूरे मामले का सच सामने लाया जाएगा।

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