बहराइच: 35 लीटर दूध से तैयार होता है 1 किलो देसी घी, कीमत जानकर उड़ जाएंगे होश

उत्तर प्रदेश के बहराइच में साहीवाल गाय के दूध से पारंपरिक बिनोला विधि द्वारा शुद्ध देसी घी तैयार किया जा रहा है, जिसकी बाजार में भारी मांग है।

शुद्धता की नई मिसाल

बाजार में मिलावटी घी से परेशान लोगों के लिए बहराइच का एक गौशाला मॉडल उम्मीद की किरण बनकर उभरा है। यहां साहीवाल और गिरी नस्ल की गायों के दूध से पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से देसी घी बनाया जा रहा है। इस घी की शुद्धता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे सरकार की ओर से प्रमाण पत्र भी प्राप्त हुआ है।

बिनोला विधि से होती है खास तैयारी

इस घी को तैयार करने के लिए सदियों पुरानी बिनोला विधि का उपयोग किया जाता है। प्रक्रिया के बारे में बताते हुए गौशाला प्रबंधन से जुड़े रामसेवक वर्मा ने कहा कि इसकी निर्माण प्रक्रिया अत्यंत जटिल है:

  • सबसे पहले गायों के दूध से मिट्टी की हांडी में दही जमाया जाता है।
  • दही के ऊपर जमी मलाई को निकालकर उसे मथा जाता है जिससे मस्का तैयार होता है।
  • इस पूरी प्रक्रिया के बाद लगभग 30 से 35 लीटर दूध से केवल 1 किलो शुद्ध A2 घी प्राप्त होता है।

कीमत और कमाई का गणित

अपनी उच्च गुणवत्ता और औषधीय गुणों के कारण यह घी 2500 रुपये प्रति किलो की दर से बिकता है। रामसेवक वर्मा के अनुसार, इस घी की बाजार में काफी मांग है और प्रतिदिन लगभग 8 से 10 किलो घी की खपत होती है। इस हिसाब से महीने में करीब 240 किलो घी की बिक्री हो जाती है। मुनाफा कमाने के मामले में, प्रति किलो 300 रुपये की बचत के साथ गौशाला को हर महीने लगभग 72000 रुपये की आमदनी हो जाती है।

उपलब्धता

उपभोक्ता इस शुद्ध घी को बहराइच शहर के कृषि भवन स्थित मिलेट्स गैलरी से सीधे खरीद सकते हैं। इसके अलावा इसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी उपलब्ध कराया गया है। साहीवाल और गिरी नस्ल की गायों की विशेष देखरेख और पारंपरिक निर्माण पद्धति ही इस घी के महंगे और खास होने का मुख्य कारण है।

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