मुरादाबाद: किसान अंकुर त्यागी ने पारंपरिक जौ-चने के सत्तू से बनाई कमाई की राह

मुरादाबाद के प्रगतिशील किसान अंकुर त्यागी जौ और चने से पारंपरिक सत्तू तैयार कर बाजार में बेच रहे हैं, जो भीषण गर्मी में स्वास्थ्य के लिए एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरा है।

पारंपरिक तरीके से हो रही है सत्तू की तैयारी

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में एक किसान ने आधुनिक खेती और व्यवसाय का अनूठा मेल पेश किया है। किसान अंकुर त्यागी जौ और चने के मिश्रण से सत्तू बनाकर न केवल अच्छी कमाई कर रहे हैं, बल्कि लोगों को सेहतमंद रहने का संदेश भी दे रहे हैं। यह सत्तू बाजार में बिकने वाले केमिकल युक्त कोल्ड ड्रिंक्स का एक स्वस्थ विकल्प साबित हो रहा है।

कैसे तैयार किया जाता है यह खास सत्तू

अंकुर त्यागी के अनुसार, इस सत्तू को बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह से पारंपरिक है। इसे बनाने के चरण इस प्रकार हैं:

  • सबसे पहले जौ को एक पूरी रात पानी में भिगोकर रखा जाता है।
  • अगले दिन जौ को अच्छी तरह सुखाकर कड़ाही में भूना जाता है।
  • इसके बाद चने को भी भूना जाता है।
  • अंत में दोनों चीजों को मिलाकर बारीक पीस लिया जाता है, जिससे पौष्टिक सत्तू का आटा तैयार होता है।

इस मिश्रण में 70% जौ और 38% चने का उपयोग किया जाता है।

सेहत के लिए क्यों है फायदेमंद

बाजार में उपलब्ध हानिकारक पेय पदार्थों की तुलना में यह सत्तू पोषक तत्वों से भरपूर है। इसमें कैल्शियम, फॉस्फोरस और मैग्नीशियम जैसे जरूरी तत्व पाए जाते हैं। किसान का मानना है कि आज के दौर में केमिकल युक्त चीजों के सेवन से बच्चों और युवाओं का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। ऐसे में प्राकृतिक और पारंपरिक खान-पान को बढ़ावा देना बेहद आवश्यक है।

मुनाफे के साथ जन-जागरूकता

अंकुर त्यागी न केवल इस सत्तू को बाजार में बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं, बल्कि अपने घर आने वाले मेहमानों को भी इसी का सेवन कराते हैं। उनके अनुसार, गांव और शहर दोनों ही जगहों पर इस पारंपरिक उत्पाद की भारी मांग है। लोग अब इसे शरबत और लड्डू के रूप में बड़े चाव से खरीद रहे हैं, जिससे उनकी आय का एक अच्छा जरिया भी बन गया है।

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