गौ-सेवा के लिए समर्पित संकल्प
बरेली के रहने वाले अमित कुमार ने हाल ही में अपनी लंबी और चुनौतीपूर्ण यात्रा पूरी कर एक मिसाल कायम की है। अमित ने सनातन संस्कृति के प्रचार और गौ-माता के संरक्षण के उद्देश्य से करीब 7,000 किलोमीटर की पदयात्रा की है। इस दौरान उन्होंने देश भर के विभिन्न धार्मिक स्थलों, प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंगों और गोशालाओं का दौरा किया।
यात्रा की प्रेरणा और अनुभव
अमित कुमार ने बताया कि इस यात्रा की शुरुआत उन्होंने किसी प्रकार की लोकप्रियता या सोशल मीडिया पर पहचान बनाने के लिए नहीं की थी। इससे पहले वे केदारनाथ और बद्रीनाथ की साइकिल यात्रा कर चुके हैं। उसी दौरान उनके मन में यह विचार आया कि उन्हें देशभर में भ्रमण कर लोगों को गौ-संरक्षण के प्रति जागरूक करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके परिवार ने इस निर्णय में उनका पूरा साथ दिया, जिसके कारण उन्हें कठिन रास्तों पर भी कभी कोई परेशानी महसूस नहीं हुई।
चुनौतियों का किया सामना
यह यात्रा किसी भी दृष्टिकोण से सरल नहीं थी। अमित कुमार ने बताया कि वे रोजाना औसतन 40 से 45 किलोमीटर तक पैदल चलते थे। यात्रा के दौरान कई बार स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का भी सामना करना पड़ा। उन्होंने साझा किया कि तबीयत बिगड़ने पर कई बार वे केवल 10 किलोमीटर ही चल पाते थे, लेकिन भगवान और गौ-माता की कृपा से उन्होंने अपनी हिम्मत नहीं हारी और यात्रा को लगातार जारी रखा।
गोशालाओं का किया निरीक्षण
अपनी यात्रा के दौरान अमित ने देश के कई राज्यों में स्थित गोशालाओं का दौरा किया। वहां उन्होंने व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया और स्थानीय लोगों व प्रबंधन से चर्चा की। जहां भी उन्हें कोई कमी या समस्या दिखाई दी, उन्होंने उसे सुधारने के लिए अपने स्तर पर प्रयास किए। युवाओं को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि यात्रा का उद्देश्य केवल दिखावा नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति और समाज से जुड़ना होना चाहिए। उनका मानना है कि आने वाली पीढ़ी को सनातन मूल्यों और सेवा की भावना को आगे बढ़ाना चाहिए।
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