कानपुर मेडिकल कॉलेज का कमाल: योग से संभव हुई 80 प्रतिशत नॉर्मल डिलीवरी

कानपुर के एलएलआर अस्पताल में गर्भवती महिलाओं पर किए गए योग के प्रयोग ने शानदार परिणाम दिखाए हैं, जिससे प्रसव के दौरान सफलता दर में बड़ा उछाल आया है।

योग से बदला प्रसव का अनुभव

कानपुर मेडिकल कॉलेज से संबद्ध एलएलआर अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग ने चिकित्सा क्षेत्र में एक मिसाल पेश की है। विभाग द्वारा पिछले तीन वर्षों में करीब पांच हजार गर्भवती महिलाओं को नियमित योग का अभ्यास कराया गया। इसके सुखद परिणाम सामने आए हैं, जहां लगभग 80 प्रतिशत महिलाओं की नॉर्मल डिलीवरी संभव हुई और नवजात शिशु भी पूरी तरह स्वस्थ पाए गए।

तीन साल की मेहनत और कार्यशालाएं

विभाग की वरिष्ठ चिकित्सक प्रो. सीमा द्विवेदी के नेतृत्व में इस विशेष अभियान को चलाया गया। अस्पताल में आने वाली महिलाओं को नियमित चिकित्सीय जांच के अलावा योग और जीवनशैली में सुधार के लिए प्रेरित किया गया। इस दौरान निम्नलिखित प्रयास किए गए:

  • पिछले तीन वर्षों में कुल 36 कार्यशालाओं का आयोजन किया गया।
  • इन कार्यशालाओं में हजारों महिलाओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
  • औसतन छह महीने से अधिक समय तक योग करने वाली महिलाओं में प्रसव के दौरान काफी बेहतर परिणाम देखे गए।

शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार

चिकित्सकों का मानना है कि गर्भावस्था के दौरान योग से महिलाओं का शरीर लचीला बनता है और तनाव के स्तर में कमी आती है। प्रो. सीमा द्विवेदी ने बताया कि योग से महिलाओं का आत्मविश्वास भी बढ़ता है, जिससे प्रसव के समय आने वाली जटिलताएं कम हो जाती हैं। कई महिलाओं ने सामान्य प्रसव के दौरान दर्द और मानसिक दबाव कम महसूस होने की पुष्टि की है।

मां और बच्चे दोनों को फायदा

सामान्य प्रसव को प्रकृति का सबसे सुरक्षित तरीका माना गया है। इससे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार होता है और शुरुआती विकास बेहतर रहता है। इस अभियान के तहत जन्म लेने वाले अधिकांश बच्चों का वजन ढाई से तीन किलोग्राम के बीच दर्ज किया गया, जो कि एक स्वस्थ शिशु का मानक है। प्रसव के बाद मां भी जल्दी रिकवर कर पाती हैं और स्तनपान कराने में उन्हें अधिक आसानी होती है।

शोध में दर्ज हुई उपलब्धि

इस पूरे प्रयोग की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विभाग ने इस पर पांच शोध पत्र तैयार किए हैं। इन शोध पत्रों में गर्भावस्था के दौरान योग के सकारात्मक प्रभाव और सामान्य प्रसव में हुई वृद्धि का विस्तृत अध्ययन दर्ज किया गया है। चिकित्सकों की सलाह है कि योग को केवल एक दिन तक सीमित न रखकर इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाया जाना चाहिए, ताकि सिजेरियन प्रसव की दर को कम किया जा सके।

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