नैनीताल में बीमारियों का प्रकोप: पीलिया और टायफायड के 50 से ज्यादा केस रोजाना

नैनीताल में बदलते मौसम के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ गई हैं। जिला अस्पताल में हर दिन 50 से अधिक मरीज पीलिया और टायफायड जैसे संक्रमण लेकर पहुंच रहे हैं।

नैनीताल में बिगड़ते स्वास्थ्य हालात

उत्तराखंड के नैनीताल में मौसम में हो रहे लगातार बदलाव का सीधा असर अब लोगों की सेहत पर दिखने लगा है। मल्लीताल स्थित BD Pandey जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ बढ़ती जा रही है। अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 90 से 100 मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं, जिनमें से 50 से अधिक मरीज बुखार, उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, इन मरीजों में लगभग 25 प्रतिशत पीलिया के लक्षण दिखा रहे हैं।

बीमारी की मुख्य वजह

अस्पताल की फिजिशियन Dr. Shivani Singh के अनुसार, बीमारी के बढ़ने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • बदलते मौसम के बीच खानपान में बरती गई लापरवाही।
  • दूषित पानी का सेवन करना।
  • वायरल बुखार, गले में संक्रमण और सर्दी-जुकाम के बढ़ते मामले।

खासकर छोटे बच्चे, बुजुर्ग और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग इन बीमारियों की चपेट में जल्दी आ रहे हैं।

लक्षणों को न करें नजरअंदाज

डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि पीलिया और टायफायड के लक्षणों को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है।

  • पीलिया के लक्षण: आंखों और त्वचा का पीला पड़ना, भूख कम लगना, कमजोरी, उल्टी और पेट से जुड़ी समस्याएं।
  • टायफायड के लक्षण: तेज बुखार, लगातार सिरदर्द, बदन दर्द और पेट में दर्द की शिकायत।

यदि ऐसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत जांच करवानी चाहिए ताकि बीमारी गंभीर न हो।

बचाव के लिए जरूरी सावधानियां

स्वास्थ्य विभाग ने मानसून से पहले लोगों को अतिरिक्त सतर्क रहने की सलाह दी है। बचाव के लिए इन बातों का ध्यान रखें:

  • हमेशा उबला हुआ या शुद्ध पानी ही पिएं।
  • बाहर खुले में बिकने वाले भोजन और कटे हुए फलों से बचें।
  • खाना खाने से पहले और शौचालय के उपयोग के बाद साबुन से अच्छी तरह हाथ धोएं।
  • व्यक्तिगत स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।

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