खेती में क्रांति लाएगा सुपर जीवामृत
अगर आप रासायनिक खादों के महंगे खर्च और खराब होती मिट्टी से परेशान हैं, तो अब चिंता करने की जरूरत नहीं है। विंध्य क्षेत्र के किसान अब जैविक खेती की ओर रुख कर रहे हैं। फार्मिंग एक्सपर्ट Narendra Kushwaha के अनुसार, जंगल की मिट्टी और खट्टी छाछ से तैयार होने वाला यह सुपर जीवामृत आपकी फसलों के लिए किसी अमृत से कम नहीं है। यह जैविक मिश्रण फसल की पैदावार को 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ाने में सक्षम है।
कैसे तैयार करें यह खास खाद
इस खाद को बनाने की प्रक्रिया बहुत सरल है और इसके लिए आपको निम्नलिखित सामग्री की जरूरत होगी:
- एक 200 लीटर का प्लास्टिक ड्रम लें और उसमें 180 लीटर पानी भरें।
- 10 किलो देसी गाय का ताजा गोबर और 5 से 10 लीटर पुराना गौमूत्र मिलाएं।
- दो किलो पुराना गुड़ और दो किलो बेसन डालें।
- सबसे मुख्य सामग्री: एक से दो किलो घने जंगल या पुराने बरगद के पेड़ के नीचे की सजीव मिट्टी।
- तीन से पांच लीटर पुरानी खट्टी छाछ और थोड़ा सा नीम ऑयल मिलाएं।
इन सभी चीजों को एक लकड़ी के डंडे से क्लॉकवाइज दिशा में अच्छी तरह मिला लें। ड्रम को जूट की बोरी से ढककर छांव में रखें। यह टॉनिक करीब 30 दिनों में उपयोग के लिए तैयार हो जाएगा। जब यह पूरी तरह बन जाता है, तो इसमें से खुशबू आने लगती है और सतह पर झाग दिखाई देता है।
फसलों के लिए क्यों है यह जादुई टॉनिक
जंगल की मिट्टी से इसमें शक्तिशाली मायकोराइजा और खट्टी छाछ से लैक्टोबैसिलस बैक्टीरिया उत्पन्न होते हैं। इसके फायदे इस प्रकार हैं:
- यह पौधों को भरपूर पोषण देने के साथ-साथ प्राकृतिक फंगिसाइड का काम करता है, जो फसलों को बीमारियों से बचाता है।
- मिट्टी में केंचुओं की संख्या बढ़ती है, जिससे जमीन हवादार और उपजाऊ बनती है।
- फ्लावरिंग स्टेज के दौरान इसका इस्तेमाल करने से पौधों को नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश मिलते हैं, जिससे फूलों का झड़ना रुक जाता है।
- प्राकृतिक हार्मोन्स जिबरेलिन और ऑक्सिन के कारण फलों और सब्जियों का आकार बढ़ता है और उनमें चमक आती है।
उपयोग का सही तरीका
इसका लाभ उठाने के लिए दो लीटर जीवामृत को 7 लीटर पानी में मिलाएं। आप इसे स्प्रे कर सकते हैं या फिर ड्रिप और फ्लड इरिगेशन सिस्टम के जरिए सीधे खेतों में दे सकते हैं। इससे फसल की क्वालिटी और स्वाद में जबरदस्त सुधार देखने को मिलेगा। यदि आप सामान्य जीवामृत बनाना चाहते हैं, तो वह गर्मियों में 7 दिन और सर्दियों में 10 से 12 दिन में तैयार हो जाता है, जिसे सुबह-शाम डंडे से हिलाना जरूरी है।
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