Gaya: 430 साल पुराना है Manpur का इतिहास, अकबर के सेनापति Man Singh ने 1588 में बसाया था यह शहर

गया जिले के Manpur शहर का इतिहास करीब 430 साल पुराना है, जिसे मुगल बादशाह अकबर के सेनापति Man Singh ने 1588 में बसाया था। इस ऐतिहासिक शहर में आज भी सूर्य पोखर और प्राचीन सूर्य मंदिर मौजूद हैं, जहाँ छठ का पहला अर्घ्य देने की परंपरा रही है।

गया के Manpur का गौरवशाली इतिहास

बिहार के गया जिले में स्थित Manpur शहर अपनी ऐतिहासिक विरासत के लिए जाना जाता है। इस शहर की स्थापना लगभग 430 साल पहले हुई थी। इतिहास के पन्नों के अनुसार, जब देश के बड़े हिस्से पर मुगलों का शासन था, तब गया के क्षेत्र पर अफगानी पठानों का दबदबा था। इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए वर्ष 1588 के आसपास अकबर ने अपने विश्वासपात्र सेनापति Man Singh को गया भेजा था।

Manpur और मानगढ़ी की स्थापना

Man Singh ने गया के पूर्वी हिस्से में अपना डेरा जमाया और अपनी सैन्य शक्ति के दम पर अफगानी पठानों को पराजित कर गया को उनके चंगुल से मुक्त कराया। उन्होंने अन्य स्थानों से लोगों को बुलाकर एक नया शहर बसाया, जिसे Manpur नाम दिया गया। Man Singh ने यहाँ सुरक्षा के लिहाज से एक किला भी बनवाया था, जिसे मानगढ़ी के नाम से पहचाना जाता है। आज भी इसके अवशेष उस दौर की कहानी बयां करते हैं।

सूर्य पोखर और छठ महापर्व का महत्व

Man Singh ने Manpur में जल संरक्षण के लिए कई कुएं और तालाब बनवाए थे। इनमें 19 एकड़ में फैला एक विशाल तालाब शामिल है, जिसके किनारे सूर्य मंदिर स्थापित किया गया। यह स्थान आज सूर्य पोखर के नाम से प्रसिद्ध है।

  • यहाँ भगवान भास्कर के तीन स्वरूपों (प्रातः, मध्याह्न और संध्या देव) की पूजा होती है।
  • मान्यता है कि Man Singh की रानी ने ही यहाँ सबसे पहला अर्घ्य दिया था, जिसके बाद से यह स्थान छठ महापर्व के लिए प्रमुख केंद्र बन गया।
  • 1593 में मंदिर का निर्माण हुआ था और 1599 में Man Singh ने गया से प्रस्थान किया था।

बदलते नाम और पहचान

Manpur का नाम समय के साथ बदलता रहा। इसे अलग-अलग कालखंडों में इन नामों से जाना गया:

  • सदीकाबाद
  • गोपालगंज (टिकारी के महाराज कैप्टन गोपाल शरण के नाम पर)
  • बुनियादगंज (राजा बुनियाद सिंह के कार्यकाल में)

अंततः जयपुर के राजा सवाई Man Singh के सम्मान में इसे Manpur कहा जाने लगा। आज भी यहाँ का मुख्य बाजार गोपालगंज रोड के नाम से जाना जाता है। स्थानीय जानकारों के अनुसार, इस क्षेत्र का इतिहास मौर्यकाल तक जुड़ा है और यहाँ का सूर्य पोखर जलस्तर को बनाए रखने में आज भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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