खेती का बदला स्वरूप
मध्य प्रदेश के सीधी जिले में रहने वाले किसान Ramhit Kushwaha ने खेती में सफलता का नया रास्ता चुना है। रामपुर नैकिन क्षेत्र के गोपालपुर गांव के रहने वाले रामहित पहले सामान्य किसानों की तरह ही धान और गेहूं की खेती किया करते थे। हालांकि, इन फसलों में बढ़ती लागत और सीमित कमाई के कारण उन्हें आर्थिक समस्याओं से जूझना पड़ता था।
सब्जी की खेती से बदली किस्मत
बाजार की जरूरतों को समझते हुए उन्होंने अपनी रणनीति बदली और पिछले 15 साल से व्यावसायिक स्तर पर सब्जी उत्पादन कर रहे हैं। उन्होंने अपनी खेती का दायरा बढ़ाने के लिए गांव के अन्य किसानों से जमीन लीज पर ली है। आज वे लगभग 2 एकड़ भूमि पर वैज्ञानिक तरीके से खेती कर रहे हैं। इस बदलाव में उन्होंने मल्चिंग तकनीक और बेहतर सिंचाई के साधनों का उपयोग किया है, जिससे फसल की क्वालिटी में भी सुधार हुआ है।
मुनाफे का गणित
उनके खेतों में इस समय मुख्य रूप से टमाटर, लौकी, भिंडी, बैंगन और करेला जैसी सब्जियां उगाई जा रही हैं। उनकी फसल की मांग केवल सीधी जिले में ही नहीं, बल्कि रीवा की मंडियों तक बनी हुई है।
- शुद्ध मुनाफा: सभी तरह के खर्च काटने के बाद रामहित कुशवाहा को हर साल करीब 2 लाख रुपये की बचत होती है।
- रोजगार का जरिया: उनके खेत में लगभग दो लोग नियमित रूप से काम कर रहे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं।
अन्य किसानों के लिए प्रेरणा
रामहित कुशवाहा की कहानी उन सभी लोगों के लिए एक सीख है जो पारंपरिक खेती के कम मुनाफे से परेशान हैं। उनका मानना है कि अगर किसान बाजार की मांग के मुताबिक आधुनिक तकनीक अपनाएं, तो खेती को एक बेहद मुनाफे वाला बिजनेस बनाया जा सकता है। उनकी मेहनत और सही योजना ने आज उन्हें एक सफल किसान के रूप में पहचान दिलाई है।
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