चीन पर निर्भरता खत्म करने की तैयारी
भारत ने रेयर अर्थ मिनरल्स की सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। चीन द्वारा इन खनिजों के निर्यात पर कड़े नियम लागू करने के बाद, भारत सरकार की कंपनी IREL अब रूस की Rosneft के साथ मिलकर साइबेरिया के Tomtor डिपॉजिट में इन महत्वपूर्ण खनिजों की खोज शुरू करेगी। Tomtor को दुनिया के सबसे बड़े अविकसित रेयर अर्थ भंडारों में से एक माना जाता है।
रूस के साथ डील का महत्व
इस साझेदारी के तहत Tomtor से प्राप्त मिनरल के सैंपल पहले रूस में प्रोसेस किए जाएंगे और उसके बाद टेस्टिंग के लिए भारत भेजे जाएंगे। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और डिफेंस सेक्टर में इन खनिजों की भारी मांग है। दिसंबर में हुए एनुअल भारत-रूस समिट में भी इस सहयोग पर विशेष चर्चा की गई थी। इसके अलावा, मई महीने में रूस की Rosatom की एक डिवीजन ने भारत की Nexon Geochem के साथ एक एमओयू भी साइन किया है, जो रेयर अर्थ प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी पर केंद्रित है।
भारत का रेयर अर्थ रिजर्व और चुनौतियां
भारत के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा रेयर अर्थ रिजर्व है, जिसका अनुमान लगभग 7.23 मिलियन मीट्रिक टन है। हालांकि, कमर्शियल स्तर पर रिफाइनिंग सुविधाओं की कमी के कारण भारत अभी भी आयात पर निर्भर है। चीन वर्तमान में दुनिया का सबसे बड़ा रेयर अर्थ सप्लायर है, लेकिन उसके एक्सपोर्ट पर पाबंदियों के कारण भारत अब अपनी रणनीति बदल रहा है।
विस्तार और भविष्य की योजना
- IREL रूस के अलावा Argentina, Australia और Malawi में भी नए अवसरों की तलाश कर रही है।
- भारत का लक्ष्य 2029 से 2030 के बीच देश में ही रेयर अर्थ मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग शुरू करने का है।
- इस दिशा में Japan और South Korea की कंपनियों के साथ भी बातचीत जारी है।
- रूस की Giredmet और भारत की TexMin (IIT ISM से जुड़ी संस्था) मिलकर मैग्नेट बनाने की नई तकनीक पर काम करेंगी।
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