भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग: लाख की चूड़ियां
राजस्थान के कोटा में बनने वाली रंग-बिरंगी लाख की चूड़ियां भारतीय संस्कृति और परंपरा का आज भी एक अभिन्न हिस्सा बनी हुई हैं। इनकी खूबसूरती और पारंपरिक महत्व इन्हें खास बनाता है।
शादी-त्योहारों पर खास मांग
शादी-ब्याह के शुभ अवसरों, तीज-त्योहारों और अन्य महत्वपूर्ण आयोजनों पर इन चूड़ियों की विशेष मांग रहती है। ये सिर्फ एक आभूषण नहीं, बल्कि भारतीय परंपराओं का प्रतीक भी हैं।
लाख की चूड़ी बनाने की पारंपरिक प्रक्रिया
इन मनमोहक चूड़ियों को बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह से पारंपरिक और हाथों से की जाती है। इस कला में कारीगरों की सालों की मेहनत और अनुभव झलकता है।
- सबसे पहले कच्चे माल, जिसे “चापड़ी” कहा जाता है, उसे गर्म किया जाता है।
- गर्म होने के बाद इसमें विभिन्न खूबसूरत रंग मिलाए जाते हैं।
- अंत में, इस रंगीन लाख को कुशलता से आकार देकर आकर्षक चूड़ियों में बदल दिया जाता है।
कठिन परिस्थितियों में भी जीवित कला
भयंकर गर्मी और अन्य मुश्किलों के बावजूद, कोटा के कारीगर इस प्राचीन और खूबसूरत कला को आज भी सहेजे हुए हैं। उनकी लगन और हुनर ही है जो इन रंग-बिरंगी चूड़ियों को जीवंत रखता है।
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