अनोखा संकल्प और उसकी प्रेरणा
पटना के पंचरूपी हनुमान मंदिर के पुजारी पंडित ओम तिवारी ने एक प्रेरणादायक कदम उठाया है. उन्होंने ऐलान किया है कि वे हर साल अपनी दक्षिणा और निजी आय का उपयोग कर एक जरूरतमंद बेटी की शादी करवाएंगे. पंडित जी ने यह पहल समाज में शादी के बढ़ते खर्च और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को होने वाली परेशानियों को देखते हुए शुरू की है. उनका मानना है कि बेटी का विवाह कराना सबसे बड़ा पुण्य कार्य है. वे कहते हैं कि जब तक संभव होगा, वे हर साल एक बेटी के घर में खुशियां लाने का प्रयास करते रहेंगे.
सामाजिक सरोकार और सोच
पंडित ओम तिवारी की इस नेक पहल के पीछे कुछ खास प्रेरणाएं भी हैं:
- कुछ समय पहले बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के अध्यक्ष प्रो. डॉ. रणवीर नंदन ने सभी मठ-मंदिरों से अपील की थी कि दान पेटी की राशि का एक हिस्सा गरीब बेटियों की शादी में इस्तेमाल किया जाए.
- मंदिर के सचिव मोहित प्रकाश द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्यों से भी उन्हें प्रेरणा मिली है.
पंडित ओम तिवारी का मानना है कि धार्मिक स्थलों को सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समाज के जरूरतमंद लोगों की मदद में भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए.
पंडित ओम तिवारी का परिचय
पंडित ओम तिवारी पिछले 14 वर्षों से ज्योतिष और धर्म के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे बीते सात महीनों से पटना के पंचरूपी हनुमान मंदिर में पूजा-पाठ की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. उनका मानना है कि जीवन का मकसद सिर्फ पैसा कमाना या व्यक्तिगत सुख-सुविधाएं इकट्ठा करना नहीं है, बल्कि समाज के लिए कुछ अच्छा करना भी है. इसी सोच के साथ, वे नियमित रूप से तीर्थ यात्रा करते हैं और अपनी क्षमता के अनुसार दान-पुण्य के कामों में योगदान देते हैं.
उनकी प्रारंभिक शिक्षा श्री गोरक्षनाथ संस्कृत विद्यापीठ से हुई, जबकि उन्होंने उच्च शिक्षा वाराणसी से प्राप्त की. उन्होंने डीएवी पब्लिक स्कूल, गोपालगंज और अनीसाबाद में भी सेवाएं दी हैं. वर्तमान में, वे धार्मिक और सामाजिक कार्यों में जुटे हुए हैं और एस्ट्रो वार्ता कंपनी के संस्थापक होने के साथ-साथ अशोक फाउंडेशन के संचालक भी हैं.
खुद दो बेटियों के पिता
पंडित ओम तिवारी खुद दो बेटियों के पिता हैं. उन्होंने बताया कि उन्हें दक्षिणा, एस्ट्रो वार्ता कंपनी और अशोक फाउंडेशन के माध्यम से जो भी राशि मिलती है, उसका उपयोग जरूरतमंद बेटियों के विवाह में सहयोग के लिए किया जाएगा. वे कहते हैं कि किसी भी परिवार के लिए बेटी बोझ नहीं, बल्कि सम्मान और सौभाग्य का प्रतीक होती है. एक पिता होने के नाते वे इस भावना को और गहराई से समझते हैं.
उनका यह भी मानना है कि आज भी समाज में कुछ लोग बेटियों के जन्म को लेकर पुरानी सोच रखते हैं. ऐसे में वे सामाजिक जागरूकता के जरिए लोगों की सोच बदलना चाहते हैं, ताकि हर बेटी को बराबर सम्मान और अवसर मिल सके. वे चाहते हैं कि कोई भी परिवार अपनी बेटी को बोझ न समझे और बेटियों को आगे बढ़ाने में गर्व महसूस करे.
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