देश विरोधी गतिविधियों को लेकर मध्य प्रदेश ATS की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। अब तक इस मामले में चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया जा चुका है और इन सभी का संबंध पाकिस्तान से जुड़ा पाया गया है। जांच में सामने आया है कि पाकिस्तान में बैठा इनका आका इन्हें भ्रामक जानकारी देता था और जान की कुर्बानी देने की बात कहता था। बिहार के मधुबनी से गिरफ्तार संदिग्ध आतंकी इजहार उल हक से हुई पूछताछ में कई अहम तथ्य उजागर होने का दावा किया गया है।
मधुबनी से गिरफ्तार संदिग्ध को सौंपी गई थी नेटवर्क बढ़ाने की जिम्मेदारी
जांच एजेंसी के मुताबिक मध्य प्रदेश ATS द्वारा बिहार के मधुबनी से पकड़े गए संदिग्ध आतंकी इजहार उल हक से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। एजेंसी का कहना है कि इजहार को कथित पाकिस्तानी हैंडलरों की ओर से बिहार में नेटवर्क का विस्तार करने का काम सौंपा गया था।
ATS सूत्रों के अनुसार पूछताछ में यह भी पता चला कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों के संपर्क पाकिस्तान में बैठे कथित आतंकी संचालक मुफ्ती जैनुल आब्दीन से जुड़े हुए हैं। जांच में सामने आया कि वह टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए भड़काऊ ऑडियो संदेश भेजता था और इन संदेशों के माध्यम से युवाओं को प्रभावित कर अपने नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश करता था।
भ्रामक जानकारी देकर भड़काता था पाकिस्तानी हैंडलर
ATS के अनुसार मुफ्ती जैनुल ने इजहार, नईम और फराज समेत अन्य संदिग्धों को पाकिस्तान से ऑडियो संदेश भेजे थे। जैनुल टेलीग्राम पर भड़काऊ ऑडियो बाइट भेजकर कहता था कि नबी की शान में जान देना फख्र की बात है।
जांच एजेंसी का दावा है कि इन संदेशों के जरिए भारत में सक्रिय स्लीपर सेल को धार्मिक स्थलों और अन्य संवेदनशील मुद्दों को लेकर भ्रामक जानकारी दी जाती थी, ताकि उन्हें उकसाकर किसी बड़ी साजिश के लिए तैयार किया जा सके।
पाकिस्तानी एजेंटों को सिम कार्ड उपलब्ध कराता था इजहार
पूछताछ में यह भी सामने आया कि इजहार उल हक कथित तौर पर पाकिस्तानी एजेंटों को सिम कार्ड मुहैया कराने का काम करता था। इसके लिए बिहार के अलग-अलग जिलों से विभिन्न पहचान पत्रों और आधार कार्डों का इस्तेमाल कर सिम कार्ड खरीदे गए थे। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इन सिम कार्डों की आपूर्ति नेपाल के रास्ते की जाती थी।
एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म पर होती थी बातचीत, तुरंत डिलीट होते थे चैट
जांच में यह भी पता चला कि संदिग्ध टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म के माध्यम से विदेशी संपर्कों से जुड़े हुए थे। एजेंसियों की नजर से बचने के लिए बातचीत खत्म होते ही चैट डिलीट कर दी जाती थी।
फिलहाल ATS पूरे नेटवर्क की कड़ियों को आपस में जोड़ने में जुटी है और स्लीपर सेल से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश की जा रही है। इसके साथ ही आतंकी गतिविधियों के लिए की जाने वाली कथित फंडिंग के पहलू की भी गहन जांच की जा रही है।
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