पेट का हाइड्रोक्लोरिक एसिड है बेहद घातक, फिर भी अपनी ही दीवारों को क्यों नहीं जलाता? जानें वजह

पेट में खाना पचाने वाला हाइड्रोक्लोरिक एसिड बहुत शक्तिशाली होता है, फिर भी पेट को नुकसान नहीं पहुंचाता। इसकी वजह म्यूकस की परत, बाइकार्बोनेट और लगातार बनने वाली नई कोशिकाएं हैं, जो पेट की दीवारों की रक्षा करती हैं।

हमारा शरीर भोजन को पचाने के लिए कई तरह के पाचक रस तैयार करता है। इन्हीं में से एक है हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCl)। यह बेहद ताकतवर अम्ल पेट के भीतर मौजूद कई किस्म के बैक्टीरिया को खत्म करता है और खाने को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ने का काम करता है। ऐसे में अक्सर यह सवाल उठता है कि जब इतना खतरनाक एसिड पेट के अंदर मौजूद रहता है, तो आखिर यह पेट को ही क्यों नहीं जला देता।

दरअसल, हमारे शरीर में एक खास सुरक्षा प्रणाली काम करती है, जो पेट को इस एसिड के असर से बचाए रखती है। यही कारण है कि सामान्य हालात में पेट की दीवारें सुरक्षित रहती हैं और पाचन की प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के चलती रहती है।

म्यूकस की परत बनती है सुरक्षा कवच

पेट में बनने वाला मुख्य अम्ल हाइड्रोक्लोरिक एसिड ही होता है, जो पाचन का अहम हिस्सा है। इसका काम भोजन को तोड़ना, नुकसान पहुंचाने वाले बैक्टीरिया को नष्ट करना और पाचन एंजाइमों को सक्रिय करना है। यह एसिड भले ही बहुत शक्तिशाली माना जाता हो, लेकिन शरीर ने इससे बचाव के लिए कई प्राकृतिक इंतजाम भी बना रखे हैं।

पेट की भीतरी सतह पर लगातार एक मोटी और चिपचिपी परत बनती रहती है, जिसे म्यूकस कहा जाता है। यह परत पेट की दीवार और एसिड के बीच एक ढाल की तरह काम करती है, जिसके चलते एसिड सीधे पेट की कोशिकाओं के संपर्क में नहीं आ पाता। अगर यह परत न हो, तो पेट की नाजुक कोशिकाएं एसिड से प्रभावित हो सकती हैं।

बाइकार्बोनेट भी निभाता है अहम भूमिका

सुरक्षा का जिम्मा सिर्फ म्यूकस ही नहीं उठाता, बल्कि इस परत के भीतर बाइकार्बोनेट नाम का पदार्थ भी मौजूद रहता है। बाइकार्बोनेट एसिड को निष्क्रिय करने या उसका असर कम करने में मदद करता है। इस तरह म्यूकस और बाइकार्बोनेट मिलकर पेट की सतह को अतिरिक्त सुरक्षा देते हैं, जिससे एसिड का नुकसानदेह असर घट जाता है।

इसके अलावा पेट की भीतरी सतह की कोशिकाएं तेजी से नष्ट होती और नई बनती रहती हैं। यह प्रक्रिया पेट को सेहतमंद बनाए रखती है। अगर किसी वजह से कुछ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता भी है, तो शरीर उन्हें जल्दी बदलने की क्षमता रखता है। यही कारण है कि पेट की परत खुद को लगातार रिपेयर करती रहती है।

कब खड़ी होती हैं दिक्कतें

जब यह सुरक्षा तंत्र कमजोर पड़ने लगता है, तभी समस्याएं पैदा होती हैं। म्यूकस की परत को नुकसान पहुंचने, बैक्टीरियल संक्रमण, दर्द निवारक दवाओं के ज्यादा सेवन, धूम्रपान या किसी अन्य वजह से पेट और छोटी आंत की परत प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में एसिड सीधे ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे अल्सर जैसी परेशानियां विकसित होने लगती हैं।

पेट को स्वस्थ रखने के उपाय

पेट को सेहतमंद बनाए रखने के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार लेना जरूरी है। बहुत ज्यादा मसालेदार, तला-भुना और प्रोसेस्ड भोजन सीमित मात्रा में खाना बेहतर माना जाता है। इसके साथ ही पर्याप्त नींद, तनाव पर काबू, धूम्रपान और अत्यधिक शराब से परहेज भी पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद रहता है। डॉक्टर की सलाह के बिना लंबे समय तक दर्द निवारक दवाओं का सेवन करने से भी बचना चाहिए।

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