शिलांग में नॉर्थ ईस्ट इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर समिट 2026 संपन्न, पूर्वोत्तर के विकास की रूपरेखा सामने आई

मेघालय की राजधानी शिलांग में दो दिवसीय नॉर्थ ईस्ट इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर समिट एंड एग्जीबिशन 2026 का समापन हुआ, जिसमें पूर्वोत्तर भारत के विकास, निवेश और सतत विकास से जुड़े विषयों पर गहन मंथन हुआ।

मेघालय की राजधानी शिलांग में आयोजित दो दिवसीय नॉर्थ ईस्ट इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर समिट एंड एग्जीबिशन 2026 का समापन हो गया। इस सम्मेलन में नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, निवेशकों, उद्यमियों और बुनियादी ढांचा विशेषज्ञों ने भागीदारी की। आयोजन के दौरान पूर्वोत्तर भारत के विकास, निवेश और सतत विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। इस सम्मेलन का आयोजन बिल्ड इंडिया द्वारा किया गया।

समापन समारोह में केंद्रीय मंत्री का संबोधन

समापन समारोह में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर भारत को कनेक्टिविटी, व्यापार, पर्यटन और निवेश का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में केंद्र सरकार निरंतर प्रयासरत है। उनके अनुसार यह आयोजन भी इसी लक्ष्य की ओर बढ़ता एक कदम है।

शेखावत ने जानकारी दी कि वर्ष 2014 से लेकर अब तक इस क्षेत्र में सड़क, रेलवे, हवाई अड्डे, जलमार्ग, डिजिटल नेटवर्क और ऊर्जा परियोजनाओं पर 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जा चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बुनियादी ढांचे का विकास केवल सड़कों और पुलों के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मकसद आम लोगों को अवसरों, सेवाओं और बाजारों से जोड़ना भी है।

केंद्रीय मंत्री ने पूर्वोत्तर को दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए भारत का प्रवेश द्वार बताते हुए इस क्षेत्र में मौजूद पर्यटन और निवेश की संभावनाओं पर विशेष बल दिया।

दूसरे दिन के प्रमुख सत्र

सम्मेलन के दूसरे दिन पर्यटन, औद्योगिक विकास, हरित ऊर्जा, बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण और स्टार्टअप्स जैसे विषयों पर कई अहम सत्र आयोजित किए गए।

टिपरा मोथा के अध्यक्ष प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देब बर्मन ने अपने संबोधन में कहा कि पर्यटन से होने वाला लाभ सीधे स्थानीय समुदायों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय संस्कृति की रक्षा करते हुए विकास को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

पर्यटन और रोजगार की संभावनाएं

मेघालय के मुख्य सचिव डॉ. शकील पी. अहमद ने कहा कि पूर्वोत्तर में पर्यटन की असीम संभावनाएं मौजूद हैं और इसके जरिए स्थानीय लोगों के लिए रोजगार तथा उद्यमिता के नए रास्ते खोले जा सकते हैं। उन्होंने आतिथ्य, नर्सिंग और देखभाल सेवाओं से जुड़े प्रशिक्षण केंद्रों में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

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