बिहार में हुनर की कभी कमी नहीं रही और यहां के युवा अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान गढ़ रहे हैं। ऐसी ही एक प्रेरक मिसाल पूर्णिया की बेटी स्नेहा झा हैं। यूजी की छात्रा स्नेहा ने अपनी सुरीली आवाज के दम पर मुंबई में ऑनलाइन आयोजित देसी वॉइस चैंपियनशिप की सिंगिंग आइकन्स श्रेणी में पहला स्थान अपने नाम किया है।
शास्त्रीय संगीत में भी पारंगत स्नेहा की गायकी ने प्रतियोगिता के निर्णायकों और श्रोताओं को इस कदर प्रभावित किया कि वह 1500 प्रतिभागियों के बीच विजेता बनकर सामने आईं। उनकी प्रतिभा देखकर लोग उन्हें भविष्य की नई श्रेया घोषाल के रूप में देखने लगे हैं। इस जीत के साथ उन्होंने पूर्णिया समेत पूरे बिहार का नाम रोशन किया है।
इस गीत ने दिलाया पहला पुरस्कार
स्नेहा ने बताया कि प्रतियोगिता में उन्होंने “लेकर चले थे हम जिन्हें जन्नत के ख्वाब में” गीत प्रस्तुत किया था और इसी प्रस्तुति के बल पर उन्हें प्रथम पुरस्कार मिला। उनके मुताबिक इस प्रतियोगिता की जानकारी उन्हें सोशल मीडिया से मिली थी, क्योंकि यूट्यूब पर इसे लेकर एक वीडियो जारी हुआ था।
पंजीकरण निःशुल्क होने के कारण उन्होंने इसमें भाग लेने का मन बनाया। प्रतियोगिता की प्रक्रिया और जरूरी नियमों को बेहतर तरीके से समझने के लिए उन्होंने चैट जीपीटी की मदद ली और सभी मानदंडों का पालन करते हुए सफलतापूर्वक अपनी प्रस्तुति भेजी।
देशभर से जुटे 1500 से अधिक प्रतिभागी
स्नेहा ने बताया कि इस प्रतियोगिता में देशभर से 1500 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था। इतनी बड़ी संख्या देखकर शुरुआत में उन्हें थोड़ी झिझक जरूर हुई, लेकिन उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ हिस्सा लिया और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दिया।
कुछ दिनों बाद नतीजे घोषित हुए और आयोजकों ने अपनी वेबसाइट पर परिणाम का वीडियो भी अपलोड किया। नतीजे देखने के बाद स्नेहा की खुशी का ठिकाना नहीं रहा, क्योंकि उन्हें सिंगिंग आइकन्स श्रेणी में पहला स्थान मिला था। प्रतियोगिता में कुल पांच श्रेणियां थीं और हर श्रेणी में प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय स्थान के विजेता चुने गए थे। परिणाम आने के कुछ दिनों बाद स्नेहा को कूरियर के जरिए ट्रॉफी और डिजिटल प्रमाणपत्र भी प्राप्त हुआ।
बेटियों को दें सही दिशा और उड़ान
इस उपलब्धि से स्नेहा के परिवार, दोस्तों और शुभचिंतकों में खुशी का माहौल है। न्यू सिपाही टोला निवासी पिता सुब्रतो झा और मां रश्मि झा का कहना है कि बेटियों को उड़ान देने की जरूरत है, वे कहीं भी अपनी प्रतिभा साबित कर सकती हैं और उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है।
परिवार की अपील है कि सभी अभिभावक बेटा और बेटी में कोई फर्क न समझें, दोनों ईश्वर का वरदान हैं और जरूरत सिर्फ सही दिशा देने की है। बधाई देने वालों में संगीत शिक्षक मनोज कुमार, शिखा कुमारी, केशव कुमार और अनिल मिश्रा शामिल रहे। उन्होंने कहा कि पूर्णिया और बिहार के लोगों को भी स्नेहा की इस सफलता पर गर्व है।
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