यह कहानी सिर्फ एक शिक्षक की नहीं, बल्कि उस इंसान की है जिसने यह साबित कर दिखाया कि अगर हौसला बुलंद हो तो अपने सपनों के साथ-साथ दूसरों के सपनों को भी आसमान दिया जा सकता है। खंडवा के राहुल गीते ने अपने अधूरे ख्वाब को पीछे छोड़कर दूसरों के ख्वाब पूरे करने का बीड़ा उठाया।
कलेक्टर बनने का सपना और बदले हालात
राहुल गीते कभी कलेक्टर बनना चाहते थे। इसी सपने को लेकर वे पढ़ाई के लिए दिल्ली तक गए, लेकिन पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारियां उनके कंधों पर आ गईं और उन्हें घर लौटना पड़ा। परिस्थितियों ने उनकी राह जरूर मोड़ दी, मगर उनके इरादों को कमजोर नहीं कर पाईं। खुद अधिकारी नहीं बन सके, फिर भी आज वही राहुल गीते अपनी मेहनत के दम पर सैकड़ों युवाओं को सरकारी अफसर बना चुके हैं।
शिक्षा को व्यवसाय नहीं, सेवा मानते हैं
खंडवा में राहुल गीते की पहचान आज ऐसे शिक्षक के रूप में है, जो शिक्षा को कारोबार नहीं बल्कि एक सेवा समझते हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और बच्चों को पढ़ाने का संकल्प लिया। उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि उनके पढ़ाए हुए 450 से अधिक छात्र आज विभिन्न शासकीय सेवाओं में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।
इनमें से कई छात्र बड़े पदों पर पहुंच चुके हैं — कोई पुलिस विभाग में सेवाएं दे रहा है, कोई रेलवे में सीनियर सेक्शन इंजीनियर के पद पर है तो कोई कस्टम विभाग में कार्यरत है। खास बात यह है कि ग्रामीण इलाकों की कई बेटियों ने भी उनके मार्गदर्शन में पढ़ाई कर सरकारी नौकरी हासिल की और अपने परिवार तथा गांव का नाम रोशन किया।
इंपेरिकल इंस्टिट्यूट का उद्देश्य
राहुल गीते ‘इंपेरिकल इंस्टिट्यूट’ के जरिए बच्चों को शिक्षा देते हैं। उनका मकसद यही है कि हर जरूरतमंद छात्र को कम फीस में बेहतरीन शिक्षा मिल सके। जिन छात्रों की आर्थिक स्थिति कमजोर होती है, उन्हें संस्था नि:शुल्क पढ़ाती है और किताबें भी मुहैया कराती है। इतना ही नहीं, संस्था 11वीं से लेकर ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई का खर्च तक उठाती है।
राहुल सर का मानना है कि किसी भी बच्चे का सपना सिर्फ पैसों की कमी की वजह से नहीं टूटना चाहिए। उन्होंने अपने अधूरे सपनों को बच्चों के सपनों के जरिए पूरा करने का रास्ता चुना और इसी का नतीजा है कि आज सैकड़ों घरों में खुशियां पहुंच रही हैं।
गांव-गांव में बने प्रेरणास्त्रोत
खंडवा के पास जावर क्षेत्र के भकराडा गांव में अकेले राहुल गीते के 20 से 25 छात्र चयनित हो चुके हैं। कई घरों में तो उनकी तस्वीर तक लगी हुई है और बच्चे उन्हें अपना प्रेरणास्त्रोत मानते हैं। छात्र यहां तक कहते हैं कि अगर राहुल सर न होते तो वे कभी अफसर नहीं बन पाते।
राहुल गीते की यह कहानी इस बात की मिसाल है कि मजबूत इरादों के साथ इंसान न सिर्फ अपने, बल्कि दूसरों के सपनों को भी नई उड़ान दे सकता है।
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