खेती की बढ़ती लागत के बीच किसानों के लिए वर्मी कम्पोस्ट यानी केंचुआ खाद एक किफायती और कारगर विकल्प बनकर उभरी है। विशेषज्ञ चितरंजन चौरसिया का मानना है कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और खर्च कम करने के लिए किसानों को इसे जरूर अपनाना चाहिए।
क्यों फायदेमंद है केंचुआ खाद
चितरंजन चौरसिया बताते हैं कि वर्मी कम्पोस्ट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे बनाने में बहुत कम लागत आती है और इसके लिए अधिक जगह की भी आवश्यकता नहीं पड़ती। इस प्रक्रिया से किसानों को पूरी तरह प्राकृतिक खाद प्राप्त होती है, जो मिट्टी की सेहत के लिए बेहद लाभकारी मानी जाती है।
कब शुरू करें तैयारी
विशेषज्ञ के अनुसार मध्य प्रदेश में जून के मध्य से मानसून सक्रिय हो जाता है। उनका सुझाव है कि प्री-मानसून बारिश की शुरुआत होते ही केंचुआ खाद बनाने का काम आरंभ कर देना चाहिए।
बारिश के मौसम का लाभ
बरसात के दौरान खाद तैयार करना अपेक्षाकृत आसान रहता है, क्योंकि इस मौसम में गोबर में अलग से अतिरिक्त पानी देने की जरूरत कम पड़ जाती है। इससे किसानों की मेहनत और संसाधन दोनों की बचत होती है।
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