उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड इटियाथोक के एक किसान ने बैंगन की खेती करके इलाके में नई मिसाल पेश की है। परंपरागत फसलों को छोड़कर सब्जी उत्पादन का रास्ता चुनने वाले इस किसान ने अब बैंगन से अच्छी कमाई करनी शुरू कर दी है। उनकी कामयाबी से प्रेरित होकर आसपास के कई किसान भी सब्जी की खेती की ओर रुख कर रहे हैं।
पूरे साल बनी रहती है मांग
प्रगतिशील किसान नान बाबू गोस्वामी का कहना है कि बैंगन एक ऐसी फसल है जिसकी मांग बाजार में सालभर बनी रहती है। यही वजह रही कि उन्होंने अपने खेत में इसकी बड़े पैमाने पर खेती करने का फैसला किया। शुरुआत में उन्होंने खेत की अच्छी जुताई की, उन्नत किस्म के बीज चुने और समय-समय पर सिंचाई, निराई-गुड़ाई तथा पौधों की देखरेख पर विशेष ध्यान दिया।
आठवीं तक पढ़ाई, फिर खेती को बनाया जीवन
नान बाबू गोस्वामी बताते हैं कि उन्होंने कक्षा 8 तक पढ़ाई की और इसके बाद पढ़ाई छोड़कर पूरी तरह खेती-किसानी को अपना लिया। फिलहाल वे करीब 15 बिस्वा भूमि में बैंगन की खेती कर रहे हैं। उनके अनुसार बैंगन की खेती का विचार उन्हें बलरामपुर के एक किसान को देखकर आया, जबकि आधुनिक तरीके से खेती करने की प्रेरणा उन्हें पानी संस्थान से मिली।
70 से 90 दिनों में तैयार होती है फसल
उनके मुताबिक बैंगन की फसल लगभग 70 से 90 दिनों में तैयार हो जाती है और इसके बाद कई महीनों तक लगातार तुड़ाई की जा सकती है। वे बताते हैं कि नियमित रूप से बाजार में बैंगन बेचने से उन्हें अच्छा मुनाफा मिल रहा है। स्थानीय मंडियों के साथ-साथ आसपास के दूसरे बाजारों में भी उनकी फसल की अच्छी मांग रहती है।
लागत और आमदनी का हिसाब
नान बाबू गोस्वामी का मानना है कि अगर बैंगन की खेती वैज्ञानिक ढंग से की जाए तो कम क्षेत्र में भी बेहतर आय हासिल की जा सकती है। फसल की गुणवत्ता अच्छी होने पर व्यापारी ऊंचे दाम देने को तैयार रहते हैं, यही कारण है कि उनकी आय अब लाखों रुपये तक पहुंच गई है।
वे बताते हैं कि बैंगन की खेती में उनकी लागत लगभग 2,000 से 2,500 रुपये आई है। वहीं इस फसल से करीब 50,000 से 60,000 रुपये की आमदनी की उम्मीद है, और अगर फसल बेहतर रही तो आमदनी लाखों रुपये तक पहुंच सकती है।
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