हिंदू धर्म में प्रत्येक तिथि और वार का अपना विशेष महत्व बताया गया है। हर माह में दो एकादशी तिथियां आती हैं—एक शुक्ल पक्ष की और दूसरी कृष्ण पक्ष की। साल भर में पड़ने वाली 24 एकादशियों में से निर्जला एकादशी को सबसे विशिष्ट माना जाता है। यह तिथि ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में आती है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से भगवान विष्णु अपने भक्तों की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। इस वर्ष इस पर्व पर एक विशेष संयोग भी बन रहा है, जो इसे और अधिक खास बना रहा है।
निर्जला एकादशी की सही तिथि
उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, वैदिक पंचांग में एकादशी तिथि 24 जून 2026 को दोपहर 02 बजकर 42 मिनट पर आरंभ होगी और 25 जून 2026 को शाम 04 बजकर 39 मिनट पर समाप्त होगी। उदयातिथि को मान्यता दिए जाने के कारण निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून 2026, गुरुवार के दिन रखा जाएगा।
शुभ योग में पड़ रही है एकादशी
इस साल निर्जला एकादशी अत्यंत खास और पुण्यदायी मानी जा रही है। इस अवसर पर रवि योग का शुभ संयोग बन रहा है, जिसे सभी प्रकार के दोषों का नाश करने वाला तथा हर कार्य में सफलता दिलाने वाला माना जाता है। उल्लेखनीय है कि यह पवित्र तिथि गुरुवार को पड़ रही है, जो भगवान विष्णु की उपासना के लिए विशेष रूप से शुभ दिन माना गया है। ऐसे दुर्लभ संयोग में व्रत और पूजन करने से कई गुना अधिक शुभ फल प्राप्त होने की मान्यता है।
निर्जला एकादशी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत बेहद पुण्यदायी होता है। ऐसा माना जाता है कि केवल इस एक व्रत के पालन से अधिकमास की दोनों एकादशियों सहित पूरे साल भर की समस्त एकादशियों के व्रत के बराबर फल मिल जाता है। जहां अन्य एकादशी व्रतों में भोजन प्रमुख होता है, वहीं निर्जला एकादशी में अन्न के साथ-साथ जल का भी त्याग कर उपवास रखा जाता है।
निर्जल रहकर किया जाने वाला यह कठिन व्रत आत्मसंयम और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इससे मन की शुद्धि होती है, शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस व्रत को स्त्री और पुरुष दोनों ही पूरी श्रद्धा के साथ रख सकते हैं।
व्रत के दिन क्या करें
एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए। पूजा के दौरान भगवान विष्णु को पीली मिठाई का भोग अर्पित करें, क्योंकि पीला रंग भगवान श्रीहरि को अत्यंत प्रिय माना जाता है। भगवान विष्णु के साथ देवी लक्ष्मी की भी पूजा करनी चाहिए। इस दिन पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाना भी शुभ माना जाता है।
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