अगर आप किसान हैं और अपनी जमीन से कम समय में बेहतर आमदनी हासिल करना चाहते हैं, तो 'पत्थरचट्टा' का पौधा आपके लिए एक बड़ा अवसर बन सकता है। यह एक ऐसा औषधीय पौधा है, जो अपने अनोखे स्वास्थ्य लाभों के लिए पहचाना जाता है और जिसकी बाजार में 12 महीने जबरदस्त मांग रहती है। खास बात यह है कि इसकी खेती के लिए न तो किसी बड़े निवेश की जरूरत है और न ही भारी-भरकम बजट की। किसान इसे छोटे स्तर पर शुरू करके भी सालाना लाखों रुपए का मुनाफा आसानी से कमा सकते हैं।
बिना बीज के तैयार होते हैं नए पौधे
पत्थरचट्टा की खेती को बाकी पारंपरिक फसलों से अलग और किफायती बनाने वाली सबसे बड़ी वजह इसका अनोखा प्रोपेगेशन है। इसे उगाने के लिए महंगे बीज खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि इसकी एक परिपक्व पत्ती से ही कई नए पौधे अपने आप उग आते हैं। यदि पत्थरचट्टा की केवल एक पत्ती को हल्की गीली मिट्टी पर रख दिया जाए, तो कुछ ही दिनों में उसके किनारों से छोटे-छोटे नए पौधे फूटने लगते हैं। इस तकनीक से किसान एक ही पौधे से बिना किसी अतिरिक्त खर्च के हजारों नए पौधे मुफ्त में तैयार कर सकते हैं, जिससे बीज की लागत पूरी तरह शून्य हो जाती है।
मिट्टी, धूप और सिंचाई की जरूरतें
पत्थरचट्टा को उगाने के लिए किसी विशेष या बहुत उपजाऊ जमीन की कोई बाध्यता नहीं है। यह सामान्य दोमट मिट्टी से लेकर मारवाड़ की हल्की रेतीली मिट्टी तक में बेहद आसानी और तेजी से बढ़ता है। इसे बड़े खेतों के साथ-साथ नर्सरी या गमलों में भी लगाया जा सकता है। इसके विकास के लिए रोजाना केवल 4 से 5 घंटे की सामान्य धूप पर्याप्त होती है। सिंचाई के मामले में भी यह किसानों के लिए वरदान साबित होता है, क्योंकि इसे बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है। ज्यादा पानी देने से इसकी जड़ें गल सकती हैं, इसलिए मिट्टी पूरी तरह सूख जाने पर ही इसमें हल्की सिंचाई करनी चाहिए।
कहां और कितने में बिकता है यह पौधा
अब सवाल यह उठता है कि इन पौधों को बेचा कहां जाए। देश की बड़ी आयुर्वेदिक दवा निर्माता कंपनियां, पतंजलि, डाबर और बैद्यनाथ जैसे हर्बल उत्पाद बनाने वाले उद्योग तथा स्थानीय सरकारी एवं निजी नर्सरियां इन पौधों और इनकी पत्तियों को थोक भाव में हाथों-हाथ खरीद लेती हैं। इसके अलावा आम लोग भी वास्तु और घरेलू उपचार के लिए इसे अपने घरों में लगाना पसंद करते हैं, जिससे खुदरा बाजार में इसका एक छोटा सा पौधा भी 30 से 50 रुपए में आसानी से बिक जाता है।
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