खेती की लागत कम करने और फसलों की उत्पादकता को बढ़ाने के मकसद से नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के इस्तेमाल को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस पहल के अंतर्गत किसानों को इन उर्वरकों के छिड़काव पर 50 प्रतिशत तक अनुदान का फायदा मिल सकता है, जिससे खेती का खर्च काफी हद तक कम होने की उम्मीद है।
नैनो उर्वरक क्यों हैं ज्यादा असरदार
नैनो तकनीक पर आधारित ये उर्वरक पारंपरिक खाद के मुकाबले बहुत कम मात्रा में भी अधिक प्रभावी साबित होते हैं। इनके इस्तेमाल से पोषक तत्व सीधे पौधों तक पहुंचते हैं, जिससे उर्वरक की बर्बादी में भी कमी आती है।
नैनो यूरिया और नैनो डीएपी की भूमिका
नैनो यूरिया फसलों को जरूरी नाइट्रोजन मुहैया कराता है, वहीं नैनो डीएपी पौधों की जड़ों को मजबूत बनाने और उनकी शुरुआती बढ़त को बेहतर करने में सहायक होता है। इस तरह दोनों उर्वरक मिलकर पौधों के समुचित विकास में अहम योगदान देते हैं।
मिट्टी और पर्यावरण को फायदा
इन उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता पर भी अनुकूल असर पड़ता है। साथ ही पर्यावरण से जुड़ा प्रदूषण कम होता है, जिससे यह तरीका खेती के लिए अधिक टिकाऊ और लाभकारी माना जा रहा है।
https://hindi.news18.com/news/agriculture/agriculture-tips-nano-urea-nano-dap-spray-50-percent-subsidy-farmers-benefits-local18-10576367.html