शादी की शुरुआत में सब कुछ रोमैंटिक और फिल्मी-सा लगता है, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है और जिम्मेदारियां बढ़ती हैं, वैसे-वैसे वह सिलसिला शुरू हो जाता है जिससे हर दूसरा जोड़ा परेशान रहता है यानी ‘रोज़-रोज़ के झगड़े’। आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में पति-पत्नी के बीच ईगो क्लैश, मिसकम्युनिकेशन और तनाव बेहद आम हो चुके हैं।
ज़िंदगी के इस मोड़ पर मन में अक्सर एक ही सवाल उठता है कि कहीं हमारा रिश्ता तो खत्म नहीं हो रहा? इसका जवाब है- नहीं। रिश्ता खत्म नहीं हो रहा, बस उसे थोड़े से ‘मेंटेनेंस’ की ज़रूरत है। नीचे बताए गए सरल तरीकों को अपनाकर आप घर के रोज़मर्रा के क्लेश को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
20 मिनट का नियम अपनाएं
जब पत्नी किसी बात पर नाराज़ हों या आप दोनों के बीच बहस छिड़ जाए, तो तुरंत पलटकर जवाब देने यानी रिएक्ट करने के बजाय सिर्फ 20 मिनट का एक ‘पॉज़’ यानी ब्रेक लें।
साइकोलॉजी कहती है कि गुस्से में हमारा लॉजिकल दिमाग काम करना बंद कर देता है और हम सिर्फ अपनी भड़ास निकालते हैं। ऐसे में बहस के बीच यह कह दें कि अभी हम दोनों गुस्से में हैं, इस पर 20 मिनट बाद शांति से बात करते हैं।
इस दौरान थोड़ा पानी पी लें या कुछ देर के लिए कमरे से बाहर निकल जाएं। जब गुस्सा शांत हो जाएगा, तो छोटी-सी बात का बतंगड़ नहीं बनेगा।
‘ब्लेम गेम’ से बचें
झगड़े तब और भड़क उठते हैं जब हम सीधे आरोप लगाने लगते हैं, जैसे ‘तुम हमेशा ऐसा ही करती हो’ या ‘तुम्हारी वजह से यह हुआ’। इसके बजाय अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए ‘मैं’ शब्द का इस्तेमाल करें।
उदाहरण के लिए, ‘तुम कभी मेरी बात नहीं सुनतीं’ कहने के बजाय यह कहें कि जब मुझे अपनी बात रखने का मौका नहीं मिलता तो मुझे बुरा लगता है। जब आप आरोप लगाना छोड़ देते हैं, तो सामने वाला डिफेंसिव होने के बजाय आपकी बात समझने की कोशिश करता है।
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