मुंह में बार-बार छाले या बदलती आवाज को न करें अनदेखा, हो सकते हैं ओरल कैंसर के शुरुआती संकेत

मुंह के छाले और आवाज में बदलाव अक्सर सामान्य होते हैं, पर अगर ये लंबे समय तक बने रहें तो यह ओरल कैंसर की चेतावनी हो सकती है। जानिए इसके लक्षण, कारण और कब डॉक्टर से मिलना जरूरी है।

मुंह में छालों का पड़ना आम बात है। कई बार ज्यादा गर्म चीजें खाने-पीने से मुंह के भीतर छाले उभर आते हैं। असल में मुंह के अंदर की त्वचा बहुत नाजुक होती है, इसलिए छालों का बनना स्वाभाविक है और ये कुछ ही दिनों में अपने आप ठीक भी हो जाते हैं। इसी तरह सर्दी-जुकाम के दौरान कई बार हमारी आवाज भी बदल जाती है। लेकिन अगर आवाज में आया बदलाव और मुंह के छाले लगातार बने रहें और जल्दी ठीक न हों, तो सतर्क हो जाना चाहिए, क्योंकि यह ओरल कैंसर का संकेत भी हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार इस बीमारी को विस्तार से समझना बेहद जरूरी है, ताकि हम समय रहते सावधान रहकर इस घातक कैंसर से खुद को सुरक्षित रख सकें।

ओरल कैंसर के शुरुआती लक्षण

मुंह में लगातार छाले पड़ना और उनका जल्दी ठीक न होना, आवाज में बदलाव, मुंह के अंदर सफेद या लाल धब्बे दिखना तथा मसूड़ों या गाल में सूजन जैसे लक्षण नजर आने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। कई बार ये स्थितियां गंभीर और घातक रूप ले सकती हैं और ओरल कैंसर का संकेत हो सकती हैं।

ओरल कैंसर के मुख्य कारण

इस बीमारी के सबसे बड़े कारणों में तंबाकू, पान मसाला और शराब का सेवन शामिल है। इनका लगातार इस्तेमाल कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ा देता है। इसके अलावा खराब ओरल हाइजीन, दांतों की नियमित सफाई न करना और लंबे समय तक दांतों या मसूड़ों की समस्याओं का इलाज न कराना भी इस रोग को बढ़ावा दे सकता है।

कब हो जाना चाहिए सतर्क?

अगर मुंह के छाले 2–3 सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें और उनका दर्द लगातार बढ़ता जाए तो इसे हल्के में न लें। इसके साथ ही मुंह के अंदर सफेद या लाल धब्बे दिखना, घाव का धीरे-धीरे बढ़ना, चबाने या निगलने में परेशानी, दांतों का ढीला पड़ना, बिना किसी कारण वजन घटना और लगातार कमजोरी महसूस होना जैसे लक्षण नजर आने पर तुरंत सावधान हो जाएं और बिना देरी डॉक्टर से जांच कराएं।

आवाज के बदलाव को न करें नजरअंदाज

अगर सर्दी-जुकाम न होने के बावजूद आपकी आवाज लंबे समय तक बैठी या भारी बनी हुई है, तो इसे सामान्य मानकर अनदेखा न करें। यह गले या मुंह के भीतर किसी गंभीर समस्या की ओर इशारा कर सकता है, जिसमें ओरल कैंसर की आशंका भी शामिल है।

समय पर पहचान बढ़ाती है ठीक होने की संभावना

ओरल कैंसर की पहचान अगर शुरुआती चरण में हो जाए तो इसका इलाज संभव है और मरीज के पूरी तरह ठीक होने की संभावना भी काफी अधिक रहती है, लेकिन इसके लिए समय पर पहचान बेहद जरूरी है। डॉक्टर आमतौर पर मुंह की जांच, बायोप्सी और अन्य आवश्यक टेस्ट के जरिए बीमारी की पुष्टि करते हैं और उसी आधार पर आगे का इलाज तय किया जाता है। जितनी जल्दी बीमारी का पता चलता है, उतना ही इलाज आसान और सफल होने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है।

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