बारिश के मौसम का इंतजार सिर्फ हरियाली और ठंडी हवाओं के लिए ही नहीं, बल्कि कुछ खास मौसमी सब्जियों के लिए भी किया जाता है। ऐसी ही एक देसी सब्जी है जंगली मुरेला, जो साल भर में बस सीमित समय के लिए बाजार में नजर आती है। कई इलाकों में इसे करेले का छोटा भाई तक कहा जाता है, क्योंकि इसका स्वाद और गुण काफी हद तक करेले से मिलते-जुलते हैं।
क्या है जंगली मुरेला
जंगली मुरेला एक मौसमी देसी सब्जी है, जो खासतौर पर बरसात के दिनों में ही उगती है और बहुत कम समय के लिए बाजार में उपलब्ध रहती है। स्वाद में इसमें हल्की कड़वाहट होती है, ठीक वैसी ही जैसी करेले में पाई जाती है। यही वजह है कि इसे करेले से जोड़कर देखा जाता है। पोषण के मामले में इसे बेहद समृद्ध माना जाता है।
सेहत के लिए फायदेमंद
ग्रामीण इलाकों में इस सब्जी को सेहत का खजाना माना जाता है। यह पोषक तत्वों से भरपूर होती है और शरीर के लिए कई तरह से लाभकारी बताई जाती है।
- पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में सहायक मानी जाती है।
- शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार समझी जाती है।
- रक्त शर्करा यानी ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में उपयोगी मानी जाती है।
अपने इन्हीं औषधीय गुणों के चलते यह सब्जी लोगों के बीच काफी पसंद की जाती है।
कैसे बनाएं इसकी सब्जी
जंगली मुरेला की सब्जी बनाना बेहद आसान है। सबसे पहले मुरेला को अच्छी तरह धोकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। इसके बाद इसे प्याज, टमाटर और मसालों के साथ भूनकर पकाया जाता है। कुछ लोग इसे अलग तरीके से भी पसंद करते हैं और कुरकुरा तलकर इसका आनंद लेते हैं।
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