आज मध्य प्रदेश के पढ़े-लिखे नौजवान नौकरी या किसी और के यहां काम करने के बजाय अपना खुद का कारोबार खड़ा करने को तरजीह दे रहे हैं। ऐसी ही एक मिसाल हैं विक्रम सोनार, जिन्हें कपड़ों के व्यवसाय का विचार उनके बड़े भाई से मिला। करीब 10 साल पहले उन्होंने ₹100000 का लोन लेकर यह काम शुरू किया था और आज वे हर साल 2 से 3 लाख रुपये कमा रहे हैं।
भाई के सहारे खड़ा हुआ कारोबार
विक्रम बताते हैं कि उनके बड़े भाई ने न सिर्फ उन्हें कपड़े के बिजनेस का आइडिया दिया, बल्कि खुद के नाम पर ₹100000 का लोन उठाकर रकम भी मुहैया कराई। इसी रकम से विक्रम ने कपड़े लाकर फुटपाथ पर ठेला लगाना शुरू किया।
शुरुआती दिनों में उन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा, लेकिन न तो विक्रम ने और न ही उनके भाई ने हिम्मत हारी। भाई उनकी किस्त भी भरते रहे। इसी सहयोग और मेहनत का नतीजा है कि आज विक्रम सफलता की राह पर हैं।
बच्चों से बड़ों तक के कपड़े उपलब्ध
विक्रम के पास बच्चों से लेकर बड़ों तक के कपड़े आसानी से मिल जाते हैं। वे गांधी चौक क्षेत्र में ठेला लगाकर अपनी दुकान चलाते हैं। उनका कहना है कि वे दिल्ली, मुंबई, गुजरात और जलगांव से कपड़े लाकर बेचते हैं, जो ग्राहकों को खूब पसंद आते हैं।
200 से 300 रुपये में मिलती है ड्रेस
विक्रम के मुताबिक वे दिल्ली, मुंबई, आगरा, गुजरात और जलगांव से माल मंगवाते हैं। सस्ता माल आने की वजह से वे इसे बाजार में भी कम दाम पर बेचते हैं। उनके यहां 200 से 300 रुपये में ड्रेस आसानी से मिल जाती है, यही वजह है कि लोग खरीदारी के लिए उनके पास आते हैं।
बाजार में उनकी दुकान सुबह 10:00 बजे से रात 8:00 बजे तक खुली रहती है।
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