कानपुर: कानपुर कमिश्नरेट की साइबर क्राइम सेल और शिवराजपुर थाना पुलिस ने मिलकर देशभर में फैले एक संगठित साइबर ठगी नेटवर्क को बेनकाब किया है। इस कार्रवाई में गिरोह के 6 सदस्यों को दबोचा गया है, जो ग्रामीणों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उन्हें साइबर अपराधियों के हवाले कर देते थे। इन्हीं खातों के माध्यम से करीब 225 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेनदेन सामने आया है।
पूरे मामले की पृष्ठभूमि
डीसीपी वेस्ट एसएम कासिम आबिदी ने प्रेस वार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि पकड़े गए आरोपियों के पास से करीब 450 म्यूल अकाउंट का ब्योरा मिला है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि इन खातों का उपयोग डिजिटल अरेस्ट, फर्जी जांच एजेंसियों के नाम पर धमकाने और अन्य प्रकार की साइबर ठगी में किया जा रहा था। अनुमान है कि गिरोह अब तक 2000 से अधिक लोगों को अपना निशाना बना चुका है।
सरकारी योजना का लालच देकर खुलवाते थे खाते
जांच में सामने आया कि आरोपी शिवराजपुर इलाके के कुकरी, भैसऊ और आसपास के गांवों के लोगों को सरकारी योजनाओं का फायदा दिलाने का झांसा देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। इसके बाद बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड और दूसरे जरूरी दस्तावेज अपने पास रखकर खुद ही इन खातों का संचालन करते थे। बदले में खाताधारकों को हर महीने 5 से 10 हजार रुपये तक दिए जाते थे।
क्रिप्टोकरेंसी से छिपाई जाती थी रकम
विभागीय सूत्रों के अनुसार, गिरोह ठगी से हासिल रकम को पहले अलग-अलग खातों में मंगवाता था और फिर उसे क्रिप्टोकरेंसी में लगा देता था। टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए पर्सन-टू-पर्सन ट्रेडिंग करके यही रकम दोबारा भारतीय मुद्रा में बदलकर विभिन्न खातों में भेजी जाती थी, ताकि जांच एजेंसियों के लिए मनी ट्रेल तक पहुंच पाना कठिन हो जाए।
NCRB पोर्टल पर दर्ज मिलीं कई शिकायतें
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों से जुड़े 25 बैंक खातों की पड़ताल में NCRB पोर्टल पर 27 शिकायतें दर्ज पाई गईं। इनमें एक जनसेवा केंद्र के खाते में करीब 10 करोड़ रुपये के लेनदेन का रिकॉर्ड मिला है, और अकेले इसी खाते से जुड़ी 15 शिकायतें सामने आई हैं।
हाईस्कूल पास है गिरोह का सरगना
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अशरफ खान, सूरज कुमार, राजन कटियार, राजदीप, भीमरतन और कमल के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार गिरोह का मुखिया अशरफ खान सिर्फ हाईस्कूल तक पढ़ा है, जबकि बाकी आरोपी इंटरमीडिएट और स्नातक तक शिक्षित हैं। जांच में यह भी पता चला कि राजन और सूरज नए सदस्यों को साइबर ठगी का प्रशिक्षण देते थे।
कई राज्यों से पहुंचीं शिकायतें
इन खातों से जुड़े मामलों की शिकायतें दिल्ली, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों से मिली हैं। पुलिस का मानना है कि यह नेटवर्क अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय था।
बरामद हुआ इलेक्ट्रॉनिक और बैंकिंग सामान
पुलिस ने आरोपियों के पास से 5 मोबाइल फोन, 1 टैबलेट, 10 बैंक पासबुक, 2 चेकबुक और 12 डेबिट कार्ड बरामद किए हैं। इसके अलावा बैंक ऑफ महाराष्ट्र, पंजाब नेशनल बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ बड़ौदा में खुलवाए गए खातों की भी जांच की जा रही है।
पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और इस ठगी नेटवर्क की बाकी कड़ियों को खंगालने में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और भी बड़े खुलासे संभव हैं। फिलहाल इस कार्रवाई ने एक बड़े अपराध तंत्र पर करारी चोट की है।
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