अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक ऐसा संदेश साझा किया, जिसने तुरंत विवाद खड़ा कर दिया। अपने सोशल मीडिया मंच ट्रूथ सोशल पर उन्होंने लिखा कि अफसोस की बात है कि अगर आप तीसरी दुनिया के देशों से लोगों को बुलाते हैं, तो आप भी जल्द ही तीसरी दुनिया का देश बन जाते हैं, और आप इसके बारे में कुछ नहीं कर सकते। इसी पोस्ट में उन्होंने अमेरिका को फिर से महान बनाने की अपील भी दोहराई।
ट्रंप के इस बयान के अलग-अलग अर्थ निकाले जा रहे हैं और सवाल उठ रहा है कि उनका अगला निशाना आखिर कौन है। दरअसल, उनकी टिप्पणी उन लोगों पर केंद्रित थी जो बाहर से आकर अमेरिका में बस जाते हैं।
लंबे समय से अवैध इमिग्रेशन के विरोधी
ट्रंप काफी समय से अवैध इमिग्रेशन के खिलाफ रहे हैं। वे लगातार यह दलील देते आए हैं कि बड़े पैमाने पर इमिग्रेशन, खासकर लो-स्किल्ड लोगों को बुलाना और उन्हें नौकरियां देना, अमेरिका के लोगों के लिए मुश्किलें पैदा कर रहा है। उनका तर्क है कि इससे देश में श्रमिकों की मजदूरी पर भी असर पड़ता है। यह बयान उनकी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति से जुड़ा हुआ माना जा रहा है।
ले चुके हैं कड़े फैसले
अवैध अप्रवासन रोकने के लिए ट्रंप प्रशासन कई फैसले ले चुका है। इनमें सबसे प्रमुख कदमों में से एक H-1B वीजा कार्यक्रम में बदलाव रहा। प्रशासन ने 1,00,000 डॉलर का आवेदन शुल्क लागू करने और मौजूदा लॉटरी प्रणाली की जगह वेतन तथा स्किल्ड आधारित चयन प्रक्रिया लाने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, हाल ही में एक अदालत ने इस शुल्क वृद्धि पर रोक लगा दी।
किसे रोकना चाहते हैं ट्रंप
ट्रंप की आव्रजन नीति का एक बड़ा केंद्र अमेरिका–मेक्सिको सीमा पर अवैध आव्रजन को रोकना भी रहा है। राष्ट्रपति बार-बार कहते रहे हैं कि अवैध प्रवेश, मादक पदार्थों की तस्करी और अंतरराष्ट्रीय अपराध पर लगाम लगाने के लिए मजबूत सीमा नियंत्रण जरूरी है।
सीमा सुरक्षा के अलावा प्रशासन ने कानूनी आव्रजन नियमों को भी सख्त करने की दिशा में कदम उठाए हैं। इस वर्ष जारी एक व्यापक नीति निर्देश में ट्रंप प्रशासन ने प्रस्ताव रखा कि अमेरिका में रहने वाले अधिकांश अस्थायी वीजा धारकों और मानवीय पैरोल प्राप्त लोगों को ग्रीन कार्ड स्वीकृति का इंतजार करते समय अपने मूल देश लौटना होगा।
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