सोयाबीन की बुवाई में न दोहराएं यह पुरानी गलती, अपनाएं वैज्ञानिक तरीका और पाएं बंपर पैदावार

खरगोन जिले में खरीफ सीजन के साथ सोयाबीन की बुवाई जोरों पर है, लेकिन कृषि विशेषज्ञ बीज और खाद को एक साथ डालने की आम गलती से बचने की सलाह दे रहे हैं। सही खाद प्रबंधन और वैज्ञानिक तरीका अपनाने पर फसल मजबूत होती है और उत्पादन बढ़ता है।

खरीफ सीजन शुरू होते ही खरगोन जिले में सोयाबीन की बुवाई का काम तेज रफ्तार से चल रहा है। जिले में कपास के बाद सोयाबीन को सबसे प्रमुख फसल माना जाता है, इसलिए किसान इस बार भी अच्छी पैदावार की उम्मीद के साथ खेतों में जुटे हुए हैं। लेकिन कई बार बुवाई के दौरान की गई एक मामूली सी चूक पूरी फसल पर भारी पड़ जाती है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को आगाह किया है कि इस बार वे पुरानी गलतियों को न दोहराएं।

विशेषज्ञों के अनुसार, आज भी बहुत से किसान खेती के पारंपरिक ढर्रे पर ही चल रहे हैं। बुवाई के समय बीज और खाद को एक साथ खेत में डाल देना सबसे बड़ी गलती मानी जाती है। इसका सीधा असर बीज के अंकुरण और पौधों की शुरुआती बढ़वार पर पड़ता है। नतीजतन कई बार पौधे कमजोर रह जाते हैं और उत्पादन उम्मीद से कहीं कम मिलता है।

बीज और खाद को एक साथ न मिलाएं

खरगोन के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजीव सिंह ने बताया कि सोयाबीन बेहद संवेदनशील फसल है और इसकी खेती में जरा सी लापरवाही भी भारी नुकसान का कारण बन सकती है। उन्होंने बताया कि कई किसान बुवाई के समय उर्वरक को सीधे बीज के साथ मिला देते हैं, जिससे बीज पर नकारात्मक असर पड़ता है। कई बार तो बीज जल जाते हैं या उनका अंकुरण प्रभावित हो जाता है।

डॉ. सिंह का कहना है कि किसानों को बुवाई के दौरान खास सावधानी बरतनी चाहिए। बीज और उर्वरक को कभी भी आपस में मिलाकर एक साथ नहीं डालना चाहिए। ऐसा करने से फसल की शुरुआती ग्रोथ बाधित होती है और आगे चलकर उत्पादन घट जाता है।

सोयाबीन में खाद डालने का सही तरीका

विशेषज्ञ बताते हैं कि सबसे उपयुक्त तरीका यह है कि पहले खेत में पूरी मात्रा में उर्वरक डाला जाए और उसके बाद ही बुवाई की जाए। ध्यान देने वाली बात यह है कि जितनी भी खाद डालनी हो, उसे एक ही बार में पूरे खेत में डालें। बाद में इस्तेमाल के लिए उर्वरक बचाकर रखने से पौधों को पूरा पोषण नहीं मिल पाता।

विशेषज्ञों के मुताबिक सही तरीके से खाद प्रबंधन करने पर सोयाबीन की फसल मजबूत होती है और उत्पादन भी बेहतर मिलता है। इसके साथ ही खेत की नमी बनाए रखना और समय पर खरपतवार पर नियंत्रण करना भी उतना ही जरूरी है।

बदलना होगा खेती का पुराना तरीका

डॉ. सिंह के अनुसार अब किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर वैज्ञानिक तरीके अपनाने की जरूरत है। आधुनिक तकनीक और सही सलाह के साथ खेती करने पर लागत कम होती है और उत्पादन ज्यादा मिलता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सोयाबीन जैसी फसलों में अगर शुरुआत से ही सावधानी बरती जाए तो बेहतर पैदावार के साथ अच्छा मुनाफा भी कमाया जा सकता है।

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