'ट्रंप की डील हम पर लागू नहीं', नेतन्याहू के मंत्री बेन ग्वेर के तीखे बयान से बढ़ी हलचल

अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर समझौते के ऐलान के बीच इजरायली मंत्री बेन ग्वेर ने कहा कि यह डील इजरायल पर लागू नहीं होती और उनका देश किसी के अधीन नहीं है। उनके इस बयान से मिडिल ईस्ट में फिर तनाव बढ़ गया है।

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा टकराव फिलहाल थम गया है और दोनों देशों ने आपसी समझौते की घोषणा कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि ईरान के साथ डील हो चुकी है। इसके बाद ईरान की ओर से भी कहा गया कि कई महीनों तक चली लंबी और कठिन बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने सीजफायर के MoU को अंतिम रूप दे दिया है। इस घोषणा से मिडिल ईस्ट में शांति बहाल होने की उम्मीद जगी है। लेकिन इसी बीच इजरायल के दक्षिणपंथी नेता और नेतन्याहू सरकार के मंत्री बेन ग्वेर का एक बयान सामने आया, जिसने क्षेत्र के देशों की चिंता एक बार फिर बढ़ा दी है।

यहूदी समुदाय के प्रति जिम्मेदारी पर जोर

बेन ग्वेर ने कहा कि ट्रंप का यह समझौता इजरायल पर लागू नहीं होता। उनके मुताबिक इजरायल किसी के अधीन नहीं है, बल्कि एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है, जिसकी जिम्मेदारी अपने नागरिकों, IDF के सैनिकों और यहूदी समुदाय के प्रति है। उन्होंने कहा कि हजारों वर्षों के निर्वासन के दौरान सताए और मारे गए यहूदियों के प्रति यह ऐतिहासिक दायित्व है कि इजरायल की भूमि पर यहूदियों को सुरक्षा दी जाए। मंत्री ने तर्क दिया कि जब-जब इजरायल ने अपनी सुरक्षा को दांव पर रखकर अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे समर्पण किया, तब-तब उसे भारी कीमत चुकानी पड़ी। उन्होंने ओस्लो समझौते, 2006 के लेबनान समझौते और गाजा में नियंत्रण की कोशिशों का हवाला देते हुए कहा कि ये सभी बाद में इजरायल के लिए बड़ी मुश्किल साबित हुए।

'इस समझौते का हिस्सा नहीं हैं हम'

बेन ग्वेर ने आगे कहा कि इजरायल अमेरिका से प्रेम करता है और राष्ट्रपति ट्रंप का आभारी है, फिर भी इजरायल कोई कमजोर या अस्थिर देश यानी 'बनाना रिपब्लिक' नहीं है। उन्होंने बताया कि वे प्रधानमंत्री से हमेशा यही बातें कहते हैं और हर अहम ऐतिहासिक मौके पर बंद कमरों में भी इन्हें दोहराते हैं कि ऐतिहासिक क्षणों में ऐतिहासिक फैसले लेने जरूरी होते हैं। मंत्री ने दो टूक कहा कि इजरायल इस समझौते का हिस्सा नहीं है, क्योंकि यह उसकी सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं देता और किसी भी रूप में उस पर लागू नहीं होता।

उन्होंने जोर देकर कहा कि हिज़्बुल्लाह को पूरी तरह समाप्त करने से कम किसी भी शर्त पर समझौता संभव नहीं है। मंत्री के अनुसार इजरायली लड़ाकों ने जिन इलाकों पर कब्जा किया है और जहां से आतंकी ढांचे को खत्म किया गया है, वहां से पीछे नहीं हटना चाहिए। उन्होंने कहा कि इजरायल को ऐसी स्थिति में दोबारा नहीं लौटना चाहिए जहां हजारों आतंकवादी उत्तरी बस्तियों की सीमाओं पर डेरा डाले बैठे हों, और इजरायल पर होने वाले किसी भी हमले के सामने एक पल के लिए भी चुप नहीं रहना चाहिए।

'हम 3,000 साल पुराने लोग हैं'

बेन ग्वेर ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर लेबनान की ओर से इजरायल पर ड्रोन, UAV या मिसाइल दागे गए तो इजरायल 'दाहिया' में जवाबी कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि कुछ महीने पहले तक यही शक्ति संतुलन यानी 'डिटरेंस बैलेंस' कायम था और इसे किसी भी हाल में नहीं छोड़ना चाहिए।

मंत्री ने कहा कि सबको यह स्पष्ट कर देना चाहिए कि इजरायल के लोग 3,000 साल पुराने हैं और एक ऐसा शाश्वत समुदाय हैं जो लंबे संघर्ष से नहीं घबराता। उन्होंने कहा कि उन्हें ब्रह्मांड के रचयिता पर भरोसा है, वे एक मजबूत और गर्वशील जाति हैं जो डटकर अपनी मातृभूमि लौटे हैं और अब दुश्मनों के सामने नजरें झुकाने का उनका कोई इरादा नहीं है। बेन ग्वेर ने कहा कि वे दिन अब बीत चुके हैं जब यहूदी अत्याचार सहकर भी चुप रह जाते थे, और अब ऐसा कभी नहीं होगा।

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