गेहूं और मक्का के बाद धान पर मंडराया संकट, बिहार के किसानों के लिए अल नीनो बना नई चुनौती

साल 2026 में आंधी और बेमौसम बारिश से गेहूं-मक्का को नुकसान झेल चुके बिहार के किसानों की उम्मीद अब धान पर टिकी है, लेकिन प्रशांत महासागर में सक्रिय हो रहे 'सुपर अल नीनो' से कमजोर मानसून और कम बारिश की आशंका जताई जा रही है।

बिहार के किसानों के लिए साल 2026 अब तक मुश्किलों भरा साबित हुआ है। पहले आंधी-तूफान ने गेहूं की फसल को चोट पहुंचाई और इसके बाद खराब मौसम तथा गिरती कीमतों ने मक्के की खेती पर असर डाला। हालत यह रही कि कई किसानों को महज 1700 रुपये क्विंटल की दर पर मक्का बेचना पड़ा। अब उनकी आखिरी उम्मीद धान की फसल पर जा टिकी है, लेकिन इसी बीच मौसम वैज्ञानिकों की ओर से एक नई चेतावनी सामने आ गई है।

मानसून आया, पर बारिश नदारद

राज्य में मानसून ने दस्तक तो दे दी है, मगर बारिश बेहद कम हो रही है। शुरुआती दौर में ही मानसून का यह कमजोर रुख आने वाले दिनों के लिए चिंता का विषय बन गया है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या इस बार बिहार में सामान्य से कम बारिश होगी और क्या धान की खेती पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

क्या है अल नीनो

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रशांत महासागर में अल नीनो (El Niño) की स्थिति बन चुकी है। अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA का कहना है कि इस बार यह काफी खतरनाक रूप ले सकता है, और कुछ विशेषज्ञ इसे 'सुपर अल नीनो' तक बता रहे हैं।

सरल भाषा में समझें तो जब प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है, तब दुनिया भर के मौसम का संतुलन गड़बड़ा जाता है। इसी स्थिति को अल नीनो कहते हैं। इसे यूं समझा जा सकता है कि जैसे घर का एसी अचानक ठंडी हवा की जगह गर्म हवा फेंकने लगे और पूरे कमरे का माहौल बदल जाए, ठीक उसी तरह समुद्र का बढ़ा हुआ तापमान मौसम को प्रभावित करता है।

धान की खेती पर सबसे ज्यादा असर

अल नीनो की स्थिति में आमतौर पर मानसून कमजोर पड़ जाता है, जिससे कई इलाकों में सामान्य से कम वर्षा होती है। गर्मी बढ़ सकती है और सूखे जैसे हालात भी पैदा हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अल नीनो मजबूत हुआ तो बिहार में बहुत कम बारिश हो सकती है, जहां कुछ जगहों पर ज्यादा तो कुछ जगहों पर बेहद कम पानी बरसेगा। इसका सबसे बड़ा खतरा धान की खेती पर है, क्योंकि यह फसल काफी हद तक मानसून पर ही निर्भर रहती है।

बढ़ सकती है खेती की लागत

बारिश कम होने की सूरत में किसानों को सिंचाई पर अधिक खर्च करना पड़ेगा, जिससे खेती की लागत बढ़ेगी और उत्पादन घट सकता है। इसके साथ ही जल स्रोतों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका बनी रहेगी। हालांकि राहत की बात यह है कि बिहार में मानसून प्रवेश कर चुका है और कई जिलों में अच्छी बारिश भी दर्ज की गई है।

अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि आने वाले महीनों में मानसून कितना सक्रिय रहता है। मौसम विभाग लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। फिलहाल किसानों की यही कामना है कि मानसून सामान्य रहे और धान की फसल को पर्याप्त पानी मिलता रहे।

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